– गजट के बिना अध्यक्ष नहीं चलाएंगे वित्तीय अधिकार, जावरा से उठी चिंगारी अब पूरे प्रदेश में आग !
– प्रदेशभर के नगर निकायों में मची हलचल, चुने हुए अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की वैधता पर उठे सवाल
जावरा/इंदौर। मध्यप्रदेश की नगरीय निकायों की राजनीति में बड़ा भूचाल लाने वाला फैसला सामने आया है। जावरा नगर पालिका अध्यक्ष अनम यूसुफ कड़पा के वित्तीय अधिकार इंदौर हाईकोर्ट के आदेश पर वापस लेते हुए वित्तिय अधिकारों पर अंतरिम रोक लगाई हैं। कोर्ट ने कहा कि गजट नोटिफिकेशन के बिना अध्यक्ष अपने वित्तिय अधिकारियों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने यह आदेश नगर पालिका जावरा के वार्ड क्रमांक 11 की पार्षद रुकमण राजेश धाकड़ द्वारा दायर याचिका पर आया है, जिसमें अध्यक्ष के निर्वाचन के बावजूद गजट नोटिफिकेशन जारी न होने को आधार बनाया गया था।
क्या है पूरा मामला ? –
सन् 2022 में प्रदेश भर में नगरीय निकायो के चुनाव सम्पन्न हुए थे। जिनमें प्रदेश के सभी नगर निगम में महापौर के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से हुए थे, जबकि प्रदेश के सभी नगर पालिका, नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली के आधार पर होकर पार्षदों द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया था। इसी कड़ी में जावरा नगर पालिका में अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा किया गया था, जिसमें वार्ड क्रमांक 03 की पार्षद अमन मोहम्मद युसूफ कड़पा को नपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया था। लेकिन शासन स्तर पर अब तक उसका गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। इसी मुद्दे को लेकर रुमकण राजेश धाकड़ ने 17 मार्च 26 को इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि बिना गजट नोटिफिकेशन के पद की वैधता अधूरी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों के आधार पर जावरा नपाध्यक्ष अनम कड़पा के वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से वापस लेने के निर्देश दिए हैं। साथही कोर्ट द्वारा मामले में नोटिस भी जारी किया गया हैं। मामले में अगली सुनवाई 4 मई को निर्धारित की गई हैं।
कोर्ट में क्या हुआ ? –
हाईकोर्ट में आईए नंबर 2508/2026 पर सुनवाई हुई, जिसमें तकनीकी कमियों को नजरअंदाज करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कारणों से संतुष्ट होकर कमियों को माफ कर आवेदन मंजूर कर दिया। इसके बाद मामले में एडमिशन और अंतरिम राहत पर सुनवाई की गई। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि इसी तरह का मामला डब्ल्यू पी नं. 10957/2024 में पहले ही विचाराधीन रहा है, जहां अंतरिम राहत दी जा चुकी हैं। इस आधार पर कोर्ट ने भी समानता बनाए रखने का रुख अपनाया।
फैसले के बाद मचा राजनीतिक बवाल –
इस आदेश के बाद जावरा सहित पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष अनम यूसुफ कडफ़ा ने इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है और जल्द ही डिवीजन बेंच में अपील करने की तैयारी में हैं। इधर जावरा नपाध्यक्ष के वित्तिय अधिकारी वापस लिए जाने की खबर मिलने के साथ ही जावरा की राजनीति में कई तरह की चर्चाऐं होने लगी हैं।
प्रदेशभर पर असर क्यों ? –
यह मामला सिर्फ जावरा तक सीमित नहीं है। दरअसल पूरे मध्यप्रदेश में नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पार्षदों द्वारा ही चुने गए थे। लेकिन प्रदेश की इन सभी नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में अध्यक्ष उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। ऐसे में पूर्व में ग्वालियर हाई कोर्ट ने भी ऐसी ही एक मामले में अपना निर्णय देते हुए संबंधित नपाध्यक्ष के वित्तिय अधिकारी वापस लिए थे, इसी आधार पर इंदौर हाई कोर्ट ने भी यही निर्णय दिया हैं। ऐसे में ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला अब सैकड़ों नगरीय निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की स्थिति पर सीधा असर डाल सकता हैं।
बढ़ सकता है कानूनी संकट –
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी आधार पर अन्य जगहों पर भी याचिकाएं लगती हैं तो प्रदेश के कई अध्यक्षों के अधिकार सीमित या समाप्त हो सकते हैं। इससे प्रदेशभर में प्रशासनिक और राजनीतिक संकट खड़ा होने की संभावना हैं। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार जल्द गजट नोटिफिकेशन जारी करेगी? या फिर मामला और अधिक अदालतों में उलझेगा? वहीं, अध्यक्ष द्वारा की जाने वाली अपील इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। हाईकोर्ट का यह आदेश केवल एक नगर पालिका का मामला नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की नगरीय व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत हैं।
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