– आदेश भोपाल से… मनमानी जावरा में! अटैचमेंट खत्म करने के आदेश भी ठंडे बस्ते में
जावरा। प्रदेशभर में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा वर्षों पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि गणित, विज्ञान एवं अंग्रेजी विषय के शिक्षकों को निर्वाचन कार्यों में बीएलओ या अन्य नियमित निर्वाचन ड्यूटी पर नहीं लगाया जाए। इसके बावजूद रतलाम जिले की जावरा तहसील में इन आदेशों की अनदेखी होने के आरोप सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार जावरा ब्लॉक के एक माध्यमिक विद्यालय पिपलौदा में पदस्थ गणित विषय के शिक्षक ईश्वरलाल राठौर को निर्वाचन सुपरवाइजर के पद पर नियुक्त किया गया है, जबकि संबंधित शिक्षक पढ़ाई के सबसे महत्वपूर्ण विषय से जुड़े हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब स्वयं जिम्मेदार अधिकारी ही शासन के आदेशों की अनदेखी करेंगे तो अधीनस्थ कर्मचारी नियमों का पालन कैसे करेंगे।
पहले हटाए गए, फिर दोबारा मिली जिम्मेदारी –
सूत्रों के अनुसार संबंधित शिक्षक को जुलाई 2024 में तत्कालीन एसडीएम राधा महंत ने शिकायतों और कथित लापरवाही के चलते निर्वाचन सुपरवाइजर के पद से हटा दिया था। एसडीएम महंत ने इनके स्थान पर निर्वाचन सुपरवाईजर के पद पर धर्मेन्द्र विश्नावत को पदस्थ कर दिया। करीब दो साल निर्वाचन सुपरवाईजर पद पर कार्य करने के बाद अचानक 1 अप्रैल 2026 को तत्कालीन एसडीएम सुनील जायसवाल द्वारा विश्नावत को हटाते हुए पुन: राठौर को निर्वाचन सुपरवाईजर के पद पर पदस्थ कर दिया गया, जिससे पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। जिन शिकायतों के बाद एसडीएम महंत ने राठोर ने हटाया था, उन्ही शिकायतों के बाद भी गणित विषय के शिक्षक को नियमों के विपरित निर्वाचन सुपरवाईजर जैसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पद पर कैसे पदस्थ कर दिया गया ? हटाए गए निर्वाचन सुपरवाईजर धर्मेन्द्र विश्नावत का कहना हे कि जब नियम नहीं हैं तो उन्है हटाकर किस आधार पर राठौर को निर्वाचन सुपरवाईजर बनाया गया। मामले में कई आरोप, प्रत्यारोप व सबुतों के साथ कई शिकायते तहसीलदार से लेकर जिला कलेक्टर तक हुई हैं, लेकिन मामला अब भी ठंडे बस्ते में हैं, किसी भी अधिकारी ने मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की हैं।
लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश क्या कहता है ? –
लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला कलेक्टरों, संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश में स्पष्ट कहा है कि— गणित, विज्ञान एवं अंग्रेजी विषय के शिक्षकों को बीएलओ अथवा नियमित निर्वाचन कार्यों में नहीं लगाया जाए। इन विषयों के शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। जिला शिक्षा अधिकारी इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। लेकिन आदेश का कड़ाई से पालन होना तो दूर, यहां तो नियमों के विपरित और आदेश की अवहेलना कर नियुक्त ही कर दी गई।
अटैचमेंट खत्म करने का आदेश भी बेअसर –
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इसी महीने यानी जुलाई में ही लोक शिक्षण संचालनालय ने एक और आदेश जारी कर सभी विभागों में शिक्षकों के अटैचमेंट तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जावरा में स्थिति जस की तस बताई जा रही है। निर्वाचन कार्यालय सहित कई विभागों में शिक्षक आज भी अपनी मूल पदस्थापना छोड़कर वर्षों से अन्य कार्यालयों में संलग्न हैं। यही नहीं, कई कर्मचारी भी मूल कार्यालय छोड़कर दूसरे विभागों में कार्यरत हैं, जबकि शासन का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर –
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के शिक्षक पहले ही कम हैं। ऐसे में यदि उन्हें लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाएगा तो सीधा नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई को होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्वाचन जैसे कार्यों के लिए अन्य विभागों के कर्मचारियों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं, जहां स्टाफ की उपलब्धता अपेक्षाकृत अधिक है।
सबसे बड़ा सवाल…
यदि निर्वाचन सुपरवाइजर की नियुक्ति ही शासन के निर्देशों के विपरीत है और शासकीय आदेश की अवहेलना के तहत हैं तो उनके अधीन कार्य करने वाले बीएलओ और अन्य कर्मचारी नियमों का पालन किस आधार पर करेंगे ? क्या नियम और आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं या फिर उनका पालन करवाने की जिम्मेदारी भी तय होगी? क्या जिले के जवाबदार अधिकारी इन आदेशों का पालन करेंगे या युं ही लापरवाही बरती जाती रहेगी।
प्रशासन से जवाब की प्रतीक्षा –
अब निगाहें जिला कलेक्टर, जिला निर्वाचन कार्यालय और एसडीएम कार्यालय पर टिकी हैं। देखना होगा कि
— क्या गणित, विज्ञान एवं अंग्रेजी विषय के शिक्षकों को निर्वाचन कार्यों से हटाया जाएगा ?
– क्या अटैचमेंट खत्म करने वाले आदेश का पालन कराया जाएगा? या फिर सरकारी आदेश केवल फाइलों तक ही सीमित रह जाएंगे?
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं –
– गणित शिक्षक को निर्वाचन सुपरवाइजर किस आधार पर बनाया गया ?
– क्या यह नियुक्ति लोक शिक्षण संचालनालय के आदेशों के अनुरूप है ?
– जुलाई 2026 में जारी अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ ?
– विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की जिम्मेदारी कौन लेगा ?
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