– नागदा विधायक डॉ तेजबहादुरसिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दी जानकारी
– एमपीआरडीसी के रीजनल मेनेजर भी बोले सरकार से मिली स्वीकृति
जावरा। लंबे समय से विवादों और किसान आंदोलन के केंद्र में रहे प्रस्तावित उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस वे को लेकर बड़ा मोड़ सामने आया है। किसानों की आपत्तियों और लगातार चले आंदोलन के बाद सरकार अब इस सड़क परियोजना में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार प्रस्तावित फोरलेन सड़क अब ऊँचे एलिवेटेड या अधिक ऊँचाई वाले निर्माण की बजाय ग्राउंड लेवल (जमीन स्तर) पर ही बनाई जाएगी।
नागदा विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सड़क निर्माण का स्वरूप बदल रही है। साथ ही इस मार्ग को आसपास की अन्य सड़कों से जोड़कर इसकी कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जाएगी। सरकार के इस निर्णय के बाद विधायक डॉ तेजबहादुरसिंह ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और लोक निर्माण मंत्री राकेशसिंह के प्रति आभार व्यक्त किया हैं। हालांकि राज्य सरकार की ओर से अभी तक औपचारिक आदेश या प्रेस नोट जारी नहीं हुआ है और एमपीआरडीसी (MPRDC) ने भी नया ड्राइंग या डिज़ाइन सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन विभागीय स्तर पर पुष्टि जरूर हुई है।
सरकार से मिली हैं स्वीकृति –
एमपीआरडीसी के रीजनल मैनेजर विजय सिंह ने स्वीकार किया है कि फोरलेन सड़क अब ग्राउंड लेवल पर ही बनेगी और इस संबंध में सरकार से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। अब नई तकनीकी प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़ेगी। नई गाईडलाईन मिलने के बाद आगे की प्रोसेस की जाएगी। जिसके बाद कार्य को प्रगति मिलेगी।
क्यों था किसानों का विरोध ?
दरअसल, प्रारंभिक प्रस्ताव में सड़क को ऊँचाई पर या बड़े एम्बैंकमेंट (मिट्टी भराव) के साथ बनाया जाना था। किसानों का आरोप था कि खेत दो हिस्सों में बंट जाते, सिंचाई के रास्ते बंद हो जाते, ट्रैक्टर और पशुओं की आवाजाही रुक जाती और कई जगह खेती लगभग असंभव हो जाती। वहंी सरकार द्वारा जो मुआवजा राशि दी जा रही थी, वह भी कम थी। इन्हीं कारणों से प्रभावित गांवों के किसानों ने लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन किया और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए। यह मुद्दा धीरे-धीरे जनहित बनाम विकास की बहस में बदल गया।
लागत में आएगी कमी –
नई योजना लागू होने पर क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं जावरा से उज्जैन के लिए नया और सीधा सड़क मार्ग मिलेगा, स्थानीय गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जमीन अधिग्रहण का दबाव कम होगा, किसानों की खेती और सिंचाई व्यवस्था पर कम असर पड़ेगा और सबसे अहम परियोजना की लागत में भी भारी कमी आएगी विशेषज्ञों के अनुसार, ऊँचाई घटाकर सड़क को जमीन स्तर पर बनाने से करोड़ों रुपये का खर्च बच सकता है, जिससे परियोजना के जल्द शुरू होने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
लेकिन अभी भी सवाल बाकी –
फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि नई डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) कब जारी होगी ? नया अलाइनमेंट क्या होगा ? किन गांवों की जमीन अब प्रभावित होगी या बचेगी ? जब तक सरकार की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक यह फैसला अघोषित लेकिन लगभग तय माना जा रहा है।
पिक्चर साफ, रंग लाया किसानों का आंदोलन –
यह मामला अब सिर्फ सड़क निर्माण का नहीं रहा, बल्कि यह उदाहरण बन गया है कि संगठित जनआवाज़ नीति बदलवा सकती है। जहां एक तरफ विकास की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ आजीविका और खेती का सवाल भी उतना ही बड़ा है। अगर सरकार जल्द औपचारिक घोषणा करती है तो उज्जैन-जावरा क्षेत्र को नई सड़क के साथ-साथ विकास और किसानों के बीच संतुलन का मॉडल भी मिल सकता है। सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय के बाद यह तो साफ हो गया हैं कि किसानों का आंदोलन रंग लाया हैं और यह निर्णय किसानों के हित में लिया गया हैं।

