– विंड एनर्जी साइट पर जबरन घुसने और धमकी देने का आरोप; महिला एजेंसी संचालिका को हटाने के दबाव से सियासत में उबाल
– भाजपा नेताओं, मंत्रियों और सांसद का नाम लेकर डराने के भी लगाए आरोप
– सिक्योरिटी एजेंसी मेनेजर और सुरक्षाकर्मियों ने भाजपा मंडल अध्यक्ष की दबंगई के खिलाफ एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
जावरा। रतलाम जिले के कालूखेड़ा क्षेत्र में स्थित विंड एनर्जी प्रोजेक्ट अब सिर्फ एक औद्योगिक विवाद नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक दबंगई, सत्ता के दुरुपयोग और महिला सशक्तिकरण के दावों की हकीकत को लेकर बड़ा सवाल बन गया है। यह खुलासा उस समय हुआ जब मंगलवार को मुख्यमंत्री जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में विंड एनर्जी कंपनी में काम करने वाले सुरक्षाकर्मी जावरा के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचे और जावरा विधानसभा के भाजपा के सुखेड़ा मंडल अध्यक्ष तथा मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता के करीबी माने जाने वाले रितेश जैन के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे थे। सुरक्षाकर्मियों ने भाजपा मंडल अध्यक्ष रितेश जैन पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक पद और रसूख का इस्तेमाल करते हुए कंपनी के सब स्टेशन में जबरन घुसकर अधिकारियों, इंजीनियरों और सुरक्षा कर्मियों को खुली धमकी दी —काम मुझे दो, नहीं तो ताला लगेगा और तोडफ़ोड़ होगी।
मंगलवार को इस पूरे मामले ने तूल तब पकड़ा जब सिक्योरिटी एजेंसी के मैनेजर पुष्पेन्द्रसिंह सोलंकी और दर्जनों सुरक्षाकर्मियों ने एकजुट होकर एसडीएम सुनील जायसवाल को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान तानाशाही नहीं चलेगी और दबंगई बंद करो जैसे नारे गूंजते रहे, जिससे साफ संकेत मिला कि मामला अब सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि खुला विरोध बन चुका है। हाथों में रितेश जैन के फोटो वाले पोस्टर के साथ नारेबाजी ने माहोल को काफी गर्मा दिया।
ज्ञापन में लगे मारपीट करने और धमकाने के आरोप –
एसडीएम को सौंपे ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि 23 अप्रैल को रितेश जैन अपने साथियों के साथ प्रतिबंधित सब स्टेशन क्षेत्र में घुस गए और कर्मचारियों को धमकाते हुए कहा कि यदि सिक्योरिटी, इलेक्ट्रिक और मेंटेनेंस का काम उन्हें नहीं दिया गया तो वे सब स्टेशन पर ताला लगाकर काम बंद करवा देंगे। यह भी दावा किया गया है कि कर्मचारियों को डराने के लिए यहां तक कहा गया—हेलमेट पहनकर आना, नहीं तो बचोगे नहीं। एजेंसी प्रबंधन का कहना है कि उनके पास इस पूरे घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं, जो इन आरोपों को और गंभीर बनाते हैं। मामले को और गंभीर बनाते हुए ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जैन अपनी पत्नी चांदनी जैन के सरपंच पद का इस्तेमाल कर पंचायत लेटरहेड पर कंपनी को धमकी भरे पत्र भिजवा चुके हैं। इसमें तीन दिन में मांगें नहीं मानने पर सब स्टेशन पर ताला लगाने की चेतावनी दी गई थी। वहीं रितेश जैन द्वारा आए आए दिन भोपाल से फोन लगवाए जाते हैं, अपने पद और रसुख के चलते आए दिन सांसद और मंत्रियों का नाम लेकर कर्मचारियों और संचालको को डराया भी जाता हैं।
महिला सशक्तिकरण बनाम जमीनी हकीकत (सबसे बड़ा सवाल) –
इस मामले ने सबसे बड़ा और चुभने वाला सवाल वहीं खड़ा कर दिया है, जहां राजनीतिक दावे सबसे ज्यादा किए जाते हैं—महिला सशक्तिकरण के। लेकिन ज्ञापन के अनुसार, जिस सिक्योरिटी एजेंसी को हटाने का दबाव बनाया जा रहा है, उसकी संचालिका खुद एक महिला हैं। आरोप है कि उन्हें उनके ही व्यवसाय से हटाकर बेरोजगार करने की कोशिश की जा रही है। यहीं से विरोध की आवाज और तीखी हो जाती है—जब भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण का दावा करती है, तो फिर एक महिला उद्यमी को क्यों दबाया जा रहा हैं ? अब सवाल और भी सीधे और असहज हैं कि क्या भाजपा शासन में आम नागरिक या महिला उद्यमी सुरक्षित नहीं हैं ? क्या व्यवसाय करने का अधिकार केवल राजनीतिक पदाधिकारियों तक सीमित रह गया है ? क्या सत्ता के दम पर रोजगार छीना जाएगा और समर्थकों को बांटा जाएगा ? पद का दुरुपयोग करने वाले ऐसे पदाधिकारियों को क्या पार्टी आरोप के बाद भी पद पर रखेगी या आम जनता साथ न्याय करेगी? ये सवाल अब सिर्फ ज्ञापन का हिस्सा नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के बीच चर्चा का केंद्र बनते जा रहे हैं।
डर, दबाव और ठप होता काम –
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों में डर का माहौल है। कई कर्मचारी पवन चक्कियों पर जाने से घबरा रहे हैं, जिससे मेंटेनेंस प्रभावित हो रहा है और बिजली उत्पादन पर भी असर पडऩे की बात कही गई है। यदि आरोप सही हैं, तो यह मामला सिर्फ एक कंपनी या ठेके का नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व और बिजली आपूर्ति तक प्रभावित करने वाला गंभीर मुद्दा बन सकता है।
राजनीति में उबाल, संगठन पर दबाव –
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र की राजनीति में अचानक उबाल आ गया है। एक तरफ सुरक्षाकर्मी और एजेंसी प्रबंधन खुलकर विरोध में आ गए हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के स्थानीय नेतृत्व पर भी सवालों का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है या सत्ता पक्ष के दबाव में कार्रवाई से ही मुंह फैर लेगा और क्या सत्ताधारी दल इस पूरे विवाद पर कोई स्पष्ट रुख लेता है या नहीं।


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