– किसानों के खातों से अवैध निकासी, फर्जी डिमांड ड्राफ्ट और परिजनों के खातों में राशि ट्रांसफर का मामला
– विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने मंगलवार को सुनाया फैसला
रतलाम। बहुचर्चित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बड़ावदा शाखा के बैंक धोखाधड़ी एवं गबन मामले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रतलाम ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक नेविल कावराना को दोषी करार देते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया।
इस प्रकरण में कुल 9 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक नेविल कावराना, बैंक के बिजनेस फैसिलिटेटर देवेन्द्र सांड (मृत), खुर्शीद खोखरी कावराना, कांता सांड (मृत), प्रीति सुधा सांड, यास्मिन कावराना, गुलनार कावराना, शहजाद मेहता तथा जीमी खोखरी शामिल थे। न्यायालय ने विचारण उपरांत मुख्य आरोपी नेविल कावराना को दोषी ठहराया, जबकि शेष आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
ऐसे हुआ था बैंक घोटाले का खुलासा –
जिला अभियोजन कार्यालय के अनुसार, वर्ष 2012 से 2014 के दौरान बड़ावदा शाखा में पदस्थ तत्कालीन शाखा प्रबंधक नेविल कावराना ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के बिजनेस फैसिलिटेटर देवेन्द्र सांड एवं अपने परिजनों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से वित्तीय गड़बड़ी की।
आंतरिक जांच में हुआ खुलासा –
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब उनके स्थानांतरण के बाद शाखा में पदस्थ हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुमित जैन ने आंतरिक जांच की। जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आने पर विस्तृत रिपोर्ट आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) उज्जैन को भेजी गई, जिसके आधार पर विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2020 दर्ज किया गया।
किसानों के खातों से बिना जानकारी काटी जाती थी राशि –
विवेचना में सामने आया कि आरोपी किसानों एवं अन्य खाताधारकों की जानकारी और सहमति के बिना उनके किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और अन्य खातों से राशि डेबिट कर लेते थे। इन पैसों से फसल बीमा कंपनियों तथा शासकीय विभागों के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते, लेकिन उन्हें संबंधित संस्थाओं तक भेजने के बजाय सिस्टम में निरस्त कर दिया जाता था। इसके बाद यह राशि मुख्य आरोपी नेविल कावराना, उनकी पत्नी खुर्शीद खोखरी कावराना, रिश्तेदार यास्मिन कावराना, गुलनार कावराना, शहजाद मेहता, जीमी खोखरी, बैंक के बिजनेस फैसिलिटेटर देवेन्द्र सांड, उनकी पत्नी प्रीति सुधा सांड तथा अन्य संबंधित खातों में स्थानांतरित कर अवैध लाभ लिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के सेंड्री क्रेडिटर खातों और लाभ-हानि मद से भी राशि निकालकर निजी खातों में जमा कराई गई।
केवल शाखा प्रबंधक दोषी सिद्ध –
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन ने सभी आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। विचारण के दौरान देवेन्द्र सांड एवं कांता सांड का निधन हो गया। साक्ष्यों के परीक्षण के बाद विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी नेविल कावराना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया, जबकि खुर्शीद खोखरी कावराना, प्रीति सुधा सांड, यास्मिन कावराना, गुलनार कावराना, शहजाद मेहता और जीमी खोखरी को दोषमुक्त कर दिया। प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने पैरवी की। जिला अभियोजन कार्यालय की प्रभारी उपनिदेशक एवं सहायक निदेशक अभियोजन आशा शाक्यवार ने बताया कि विस्तृत विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।


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