– युरिया और डीएपी के साथ अन्य रसायन टेकिंग के रुप में दिए जा रहे
– जिला खाद बीच दवाई विक्रेता संघ ने एक दिवसीय बंद रखकर जिला मुख्यालय पर किया प्रदर्शन
– नारेबाजी के साथ निकाली पैदल रैली, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
रतलाम। खाद बीज दवाई विक्रेता संघ जिला रतलाम के आह्वान पर बुधवार को जिले के समस्त कृषि दवाई, बीज,खाद विक्रेताओ ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया। रतलाम के रंगोली में जिले के 500 से अधिक व्यापारियों ने एकत्रित होकर उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा की। चर्चा उपरांत सभी ने रंगोली से लेकर कलेक्टर आफिस तक पैदल रैली निकालकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। रैली के दौरान सभी व्यापारी नारेबाजी कर रहे थे। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर ज्ञापन अपर कलेक्टर एवं उपसंचालक कृषि नीलम चौहान को दिया। जिसमे वर्तमान में व्याप्त समस्याओं के प्रति ध्यान आकर्षण करने, कंपनियों द्वारा यूरिया, डीएपी के साथ दी जा रही जबरन टेकिंग के साथ अमानक बीज व खाद कंपनी द्वारा निर्मित किए जाने और बीज व खाद का नमूना अमानक होने पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई निर्माता कंपनी के बजाय व्यापारी पर किए जाने का विरोध किया गया हैं। व्यापारियों ने उनकी समस्याओं को निराकरण नहीं होने पर आगामी दिनों में अनिश्चतकालीन बंद रखकर आंदोलन करने की चेतावनी भी सरकार को दी हैं।
प्रधानमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में व्यापारियों ने बताया कि भारत सरकार के द्वारा उर्वरक जैसे युरीया, डी.ए.पी, एन. पी. के एवं अन्य उर्वरक खाद पर भारी भरकम अनुदान कम्पनीयों को प्रदान किया जाता है जिससे की देश के किसानों को कम मूल्यों पर खाद उपलब्ध हो सके एवं फसलो की अच्छी पैदावार कर सके। किन्तु उक्त उर्वरक कम्पनीयां उर्वरक जैसे युरीया, डी.ए.पी, एन.पी. के एवं अन्य उर्वरक खाद के साथ आवश्यक रूप से व्यापारीयों को सल्फर, माइकोराईजा, वाटर सोलिबल फर्टिलाइजर, सिटी कंपोस्ट, कृषि दवाई, सागरीका, बीज अमोनियम सल्फेट, जैवीक केप्सुल, जिंक नैनो डी.ए.पी. नैनो युरीया, पीडीएम पोटाश, बायो फर्टिलाईजर अन्य जबरन सामग्री व्यापारीयों को प्रदान किये जाते है उक्त कारण से व्यापारियों द्वारा युरीया, डी.ए.पी, एन.पी. के उक्त सामग्रीयों को कम्पनीयों द्वारा टेंगिंग किंये माल के साथ प्रदान किया जाता है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।
जबरन टेगिंग नहीं बेचे तो होता एफसीओ को उल्लघन –
व्यापारियों ने बताया कि किसानों द्वारा उक्त सामग्री को विरोध किया जाता है एवं शासन आदेशानुसारउक्त कृत्य फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (एफसीओ) के उल्लघन की श्रेणी में आता है किन्तु व्यापारी उक्त सामग्री को विकय नही करे तो आर्थिक हानी एवं व्यापार में नुकसान और उक्त सामग्रीयों का विक्रय करे तो फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (एफसीओ) का उल्लंघन होता है। टैंगिग सामग्री कय नही करने पर कम्पनीयों द्वारा दबाव बनाया जाकर डिलरशीप बन्द कर अन्य को देने एवं रेक जिले में उपलब्ध नही करवाई जाती है एवं विभाग द्वारा समस्त कार्यवाही छोटे व्यापारियों पर की जाती आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नही की गई है।
जिले के साथ भेदभाव कर रही सरकार –
मध्यप्रदेश में खाद वितरण की व्यवस्था संयुक्त संचालक कृषि विभाग भोपाल द्वारा की जाती है किन्तु विभाग द्वारा उन कम्पनीयों को प्रदाय आदेश की मात्रा कम दी जाती हंै जो कम्पनीयां म.प्र. में शीघ्र खाद उपलब्ध कराती हों जिससे खाद की हमारे क्षेत्र में कमी और बढ़ जाती हैं एवं रतलाम में किसी भी प्रकार की खाद की गाडी की रेक लगती है तो उक्त रेक से रतलाम, मन्दसौर, धार, झाबुबा, अलीराजपुर आदि जिलों मे सप्लाई की जाती है इतने जिलो में वितरण के बावजुद जिलें में ना के बराबर रेंक का आबटंन शासन द्वारा किया जाता है और वही उज्जैन एवं इन्दौर जिलों में कई अत्यधिक मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाता है जिससे इन जिलो के साथ विभाग पक्षपात करता है। शासन द्वारा सहकारी संस्था में पूर्ण मात्रा में स्टॉक होने के बाद भी निजी विक्रेताओ के पास स्टॉक नही होने के उपरान्त भी युरीया, डी.ए.पी, एन.पी. के उपलब्ध नही कराया जाता है।
नमूना फैल तो कार्रवाई व्यापारी पर क्यों .. ?
व्यापारियों ने बताया कि शासन द्वारा खाद, दवाई एवं बीज के नमुने लिए जाते है तो इसमें नमुना फेल होने पर दुकानदार का लाईसेंस निरस्त कर दिया जाता है या निलंबित कर दिया जाता हैं, जबकि दवाई विक्रेता सील बंद दवाई, खाद एवं बीज का विक्रय करते हैं, ऐसे में यदि नमुने फैल होने पर कम्पनी की जवाबदारी बनती है ना की छोटे व्यापारियों की। लेकिन प्रशासन कंपनी पर कार्रवाई करने के बजाए व्यापारियों पर कार्रवाई करता हैं जो कि न्याय संगत नहीं हैं।
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