-एफआईआर दर्ज हुए 15 दिन से अधिक का समय बीता, फिर भी सरपंच पर क्यों मेहरबान हैं जिला पंचायत के अधिकारी
– मामले में न जिला पंचायत सीईओ ने फोन उठाया और ना ही जनपद सीईओ ने
– सरपंच से अतिक्रमणकर्ताओं से जनपद सीईओ के नाम से मांगी थी रिश्वत
– सरपंच का ऑडियों और सचिव को विडियों हुआ था जमकर वायरल
जावरा। खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान वाली कहावत ग्राम पंचायत भैसाना में अक्षरश: सही बैठती हैं। सरपंच पर अतिक्रमण करवाने और सीईओ के नाम से रिश्वत मांगे जाने के मामले में लोकायुक्त द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद भी सरपंच का अपने पद पर बना रहना इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा हैं।
दरअसल ग्राम पंचायत भैसाना के स्वामित्व की शासकीय जमीन को सरपंच पुजा पासी व सचिव प्रकाश चांवला द्वारा रूपए लेकर चर्तुसीमा पर छ: लोगों द्वारा अतिक्रमण करवाने के मामले में जिला पंचायत सीईओ ने जांच उपरांत शिकायत सही पाए जाने के बाद भी सरपचं पर धारा 40 के तहत कार्रवाई करने के बजाए प्रकरण को लोकायुक्त में भेज दिया था। जहां से जांच उपरांत सरपंच को दोषी पाते हुए लोकायुक्त उज्जैन द्वारा सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई हैं। सरपंच पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अब तक भैसाना सरपंच अपने पद पर बदस्तुर बनी हुई हैं। एफआईआर के बाद भी सरपचं पर जिला प्रशासन और जिला पंचायत के अधिकारी क्यों मेहरबान हैं … ? इसका जवाब कोई देने वाला नहीं हैं।
कार्रवाई के बजाए लोकायुक्त को भेजा था प्रकरण –
ग्राम पंचायत की शासकीय जमीन पर अतिक्रमण करवाने के मामले में उपसरपंच सत्यनारायण पाटीदार व पंचों ने जावरा एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक जनसुनवाई के माध्यम से और सीएम हेल्पलाईन तथा पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री तक शिकायत की। लेकिन मामले में पुरा साल भर से अधिक का समय बीतने के बाद भी किसी भी सक्षम अधिकारी द्वार कोई कार्रवाई नहीं की गई, इतना ही नहीं जिला पंचायत सीईओ श्रृंगार श्रीवास्तव द्वारा सरपंच के विरूद्ध धारा 40 का नोटिस जारी करने के बजाय राजनैतिक दबाव के कारण प्रकरण लोकायुक्त को भेज दिया गया। जिस पर लोकायुक्त ने मामले में सरपंच पर करीब 15 दिन पहले एफआईआर भी दर्ज करवा दी हैं। जिसकी पूष्टी स्वयं लोकायुक्त के अधिकारियों ने की हैं।
आदेश के बाद भी न तो अतिक्रमण हटा, ना ही सरपंच हटी –
मामले में जावरा तहसीलदार ने गत 11 अप्रैल 25 को जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए अंतिम बेदखली आदेश जारी कर दिया था। लेकिन इसके बाद भी अब तक उक्त जमीन से ना तो अतिक्रमण हटा और ना ही मामले में कोई कार्रवाई हो पाई हैं। प्रकरण लोकायुक्त में पहुंचने के बाद लोकायुक्त ने भी एफआईआर दर्ज करवा दी हैं, जिसकी पुष्टी लोकायुक्त की जांच अधिकारी ने की हैं, वहीं एफआईआर दर्ज करने संबंधी आदेश भी जिला पचंायत सीईओ तक पहुंचा दिया गया हैं। इसके बाद भी अब तक इस मामले में किसी कार्रवाई का न होना कई सवाल खड़े कर रहा हैं।
अधिकारियों ने नहीं उठाए फोन –
भैसाना सरपंच पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी सरपंच पद पर बने रहने के मामले में चर्चा करने हेतु प्रतिनिधि ने जिला पंचायत सीईओ श्रृंगार श्रीवास्तव तथा जनपद पंचायत जावरा के सीईओ बलवत नलवाया को मोबाईल लगाया, लेकिन दोनो ही अधिकारियों ने अपना फोन उठाना तक उचित नहीं समझा।
सीईओ के नाम से मांगी थी रिश्वत –
ग्राम पंचायत की शासकीय जमीन को सांठगांठ कर निजी लोगों के नाम किए जाने के मामले में सरपंच का एक ऑडियों क्लिप तेजी से वायरल हुआ था। जिसमें सरपचं अतिक्रमणकर्ता से सीईओ के नाम से रिश्वत मांगती सुनाई दे रही थी। इतना ही नहीं ऑडियों में वह अतिक्रमणकर्ता को सीधे सीईओ को रुपए देने की बात भी कहती सुनाई दी। सीईओ के नाम से रुपए की मांग करने के बाद भी करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका हैं, फिर भी सरपंच पर कोई कार्रवाई का न होना प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही हैं या इस प्रकार रिश्वत की मांग करने वाले सरपंचों को खुला सरंक्षण हैं … ?

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