– 10-10 हजार की वसूली, वीडियो सबूत मौजूद, फिर भी अधूरा मकान,
– क्या सिस्टम सो रहा है या सब मिलीभगत है ? अब जिला प्रशासन करेगा कार्रवाई या ले देकर दब जाएग मामला
शैलेन्द्रसिंह चौहान जावरा।
रतलाम जिले की जनपद पंचायत जावरा अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मोरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी अनियमितताओं और रिश्वतखोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह योजना, जो गरीबों को पक्का घर देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है, अब आरोपों के अनुसार स्थानीय स्तर पर उगाही का जरिया बनती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री आवास जैसी जनकल्याणकारी योजना में यदि गरीब को अपना हक पाने के लिए रिश्वत देनी पड़े, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता है।
ग्राम मोरिया निवासी रामचन्द्र शर्मा ने जिला कलेक्टर मिशासिंह को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि पीएम आवास योजना की किश्त जारी करने के नाम पर उनसे सरपंच प्रतिनिधि अमरसिंह तथा सचिव सुरेश कुमार द्वारा लगातार रिश्वत ली गई, लेकिन इसके बावजूद आज तक उन्हें योजना की पूरी राशि नहीं मिली और उनका मकान अधूरा पड़ा हुआ है।
किसने कब कितना लिया ?
कलेक्टर को की गई शिकायत के अनुसार पीडि़त ने सरपंच प्रतिनिधि अमर सिंह निवासी ग्राम रणायरा गुर्जर ने पहली किश्त पर 10,000 रुपए तथा दूसरी किश्त पर 5,000 + 5,000 वसूले गए। वहीं ग्राम पंचायत सचिव सुरेश कुमार ने 1,000 + 1,000 रुपए कुल मिलाकर 2 हजार रुपए अलग से लिए इस प्रकार, एक गरीब हितग्राही से कुल हजारों रुपये की अवैध वसूली का आरोप है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनो ने ही यह रिश्वत की राशि प्रार्थी के घर पहुंचकर प्राप्त की हैं। प्रार्थी ने शिकायत के साथ सरपंच प्रतिनिधि और सचिव द्वारा ली गई रिश्वत के विडियो एविडेंस भी कलेक्टर को दिए हैं।

रिश्वत के बाद भी नहीं मिला लाभ –
शिकायत के अनुसार रिश्वत की वसूली करने के बाद भी आवास की शेष किश्त अब तक खाते में ट्रांसफर नहीं की गई, जिसके चलते निर्माण कार्य अब तक अधूरा पड़ा हैं। मजदूरों की मजदूरी भी दस्तावेजों में दिखाकर निकाल ली गई, उसके बाद भी अब पुन: अतिरिक्त पैसों की मांग की जा रही हैं। इस स्थिति में पीडि़त आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान है और उसका मकान अधूरा पड़ा हुआ है।
राजनीतिक प्रभाव और दबाव के आरोप –
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमर सिंह, जो सरपंच का प्रतिनिधित्व करते हैं, पंचायत के अधिकांश कार्य खुद संचालित करते हैंं। वे स्वयं भाजपा के मिंडलेश्वर मंडल के उपाध्यक्ष भी हैं। ऐसे में राजनैतिक प्रभाव का भी भरपुर उपयोग किया जाकर गांव में वसुली की जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि यह तो एक मामला हैं, जिसमें शिकायत हुई हैं, लेकिन ऐसे कई और पीडि़त भी होंगे जिनसे रुपए लिए गए होंगे, लेकिन उन्होने शिकायत करने की हिम्मत नहीं दिखाई होगी। सरेआम घर पहुंचकर रिश्वत लेने के ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का भी बन जाता है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल –
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं … क्या पंचायत स्तर पर इस तरह की वसूली बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के संभव है ? वीडियो सबूत होने के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों ? क्या सरकारी योजनाएं वास्तव में गरीबों तक बिना भ्रष्टाचार के पहुंच पा रही हैं ? अब नजरें रतलाम जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी ले देकर दबा दिया जाएगा ? या उचित कार्रवाई के लिए फिर ग्रामीणों को धरने का ही सहारा लेना पड़ेगा ।
निष्पक्ष जांच और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग –
पीडि़त ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, रिश्वत की राशि वापस दिलाई जाए तथा प्रधानमंत्री आवास की शेष राशि तुरंत जारी किए जाने की मांग की हैं। स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो शासन की योजनाओं पर से जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

