– सीईओ के नाम पर वसूली के आरोप, 2023 से लंबित शिकायत पर आखिरकार अब जाकर हुई कार्रवाई
– लोकायुक्त ने भी सरपंच पर दर्ज करवाई हैं एफआईआर
जावरा। ग्राम पंचायत भैसाना की सरपंच पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में आखिरकार ढाई साल बाद प्रशासन की नींद खुली है। वर्ष 2023 से लंबित शिकायत में आरोप है कि सरपंच द्वारा शासकीय भूमि को अवैध रूप से पट्टे पर वितरित किया गया और इसके बदले में सीईओ जनपद पंचायत जावरा के नाम पर रुपए की मांग की गई। जिसका ऑडियों और विडियों भी जमकर वायरल हुआ था।
इस मामले में आरोप है कि ग्राम पंचायत भैसाना के स्वामित्व की शासकीय जमीन पर सरपंच पूजा पासी एवं सचिव प्रकाश चांवला द्वारा रुपए लेकर चर्तुसीमा के भीतर छह लोगों से अतिक्रमण करवाया गया। इतना ही नहीं उक्त मामले में जनपद सीईओ के नाम से भी इन लोगों से रिश्वत के रुपए मांगे गए थे। जिसकी शिकायत उप सरपंच और पंचों द्वारा की गई थी। जिसके बाद कई जांच हुई, जांच सही भी पाई गई, तहसीलदार जावरा ने बेदखली के आदेश भी जारी कर दिए । मौके पर पहुंचकर कब्जा भी हटा दिया, लेकिन उसके बाद भी जिला पंचायत और जिला प्रशासन द्वारा सचिव व सरपंच पर कोई कार्रवाई नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता रहा।
लोकायुक्त ने भी दर्ज करवाई एफआईआर –
जिला पंचायत सीईओ ने जांच उपरांत शिकायत सही पाए जाने के बावजूद सरपंच पर सीधे कार्रवाई करने के बजाय प्रकरण को लोकायुक्त संगठन को भेज दिया था। जहां जांच के बाद लोकायुक्त संगठन, उज्जैन ने सरपंच को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी। गंभीर बात यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी भैसाना सरपंच अब तक अपने पद पर बनी हुई हैं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
अब जाकर जारी हुआ नोटिस, मांगा 3 दिन में स्पष्टीकरण –
मामले की गंभीरता के बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठते रहे। अब जाकर जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने 7 अप्रैल 26 को म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत सरपंच पूजा पासी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसमें सरपंच से आगामी 3 दिन में स्पष्टीकरण मांगा हैं, सरपंच द्वारा स्पष्टीकरण नहीं दिए जाने के चलते एक पक्षीय कार्रवाई की बात नोटिस में कही गई हैं।
कार्रवाई में इतना विलंब क्यों … ? –
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिकायत 2023 से लंबित थी और जांच में आरोप सही पाए गए, यहां तक कि एफआईआर भी दर्ज हो गई—तो कार्रवाई में इतना लंबा विलंब क्यों हुआ ? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी दबाव का परिणाम? अब देखना होगा कि सरपंच द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण के बाद प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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