तपस्वी प्रकाशचंद्र पितलिया के 79 उपवास पर किया बहुमान
जावरा । भगवान ने कर्म निर्जरा के अनेक उपाय बताएं है उनमें से तप सबसे महत्वपूर्ण है और इसीलिए कहते हैं कि तपस्या से कटे कर्म अति भारी तप के आगे नतमस्तक दुनिया सारी। तपस्या के माध्यम से करोड़ों भव के कर्म की भी हम निर्जरा कर सकते है। भौतिक कामना से रहित तप आत्म कल्याण की सुनहरी आभा बिखेर सकता है।
उक्त विचार अ.भा. जैन दिवाकर विचार मंच एवं श्री श्वेतांबर जैन वरिष्ठ सेवा समिति द्वारा तपस्वी प्रकाशचंद्र पितलिया के 79 उपवास के तप के अनुमोदनार्थ उनके बहुमान में श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कांफ्रेंस राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु भगवंत की असीम कृपा एवं दृढ़ शक्ति के आगे शहर में पहली बार इतनी बड़ी तपस्या पितलिया कर रहे है जो आगे भी निरंतर जारी है। इस मौके पर श्री श्वेतांबर जैन वरिष्ठ सेवा समिति अध्यक्ष बसंतीलाल चपडोद, सचिव अनिल चोपड़ा, कोषाध्यक्ष नगीन सकलेचा, सह कोषाध्यक्ष सरदारमल जैन, विवाह वर्षगांठ समिति चेयरमैन राजकुमार हरण, अभय श्रीमाल, शेखर नाहर, सुरेंद्र सुराणा, तपन नाहटा आदि ने तपस्वी को माला पहनाकर सम्मान किया।

