– मध्यप्रदेश में 75 हजार अतिथि शिक्षक फिर बेरोजगारी की कगार पर
– 18 साल में 13 लाख से ज्यादा शिक्षकों का शोषण का आरोप
– लोक शिक्षण संचालनालय ने 30 अप्रेल तक ही रखने का आदेश किया जारी
भोपाल। मध्यप्रदेश के अधिकांश सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था केवल अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही चल रही हैं, उनकी शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। लोक शिक्षण संचालनालय के हालिया आदेश के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवाएं केवल 30 अप्रैल 2026 तक ही ली जाएंगी। इस आदेश के सामने आते ही प्रदेशभर के करीब 75 हजार अतिथि शिक्षकों के सामने फिर से बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी अप्रैल के अंत में अतिथि शिक्षकों को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा, जिससे यह पूरा सिस्टम यूज एंड थ्रो (इस्तेमाल करो और फेंक दो) जैसा नजर आने लगा है। शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें नियमित कर्मचारी की तरह पूरा कार्य लिया जाता है, लेकिन अधिकार और सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जाता।
18 साल से जारी अस्थायीपन का दर्द –
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि पिछले 18 वर्षों से लगातार प्रदेश सरकार अतिथि शब्द जोड़कर उनका शोषण करती आ रही हैं। हर साल नई नियुक्ति, नई प्रक्रिया और फिर अचानक सेवा समाप्त, यह चक्र उनकी जिंदगी को अस्थिर बना चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक प्रदेश में लगभग 13 लाख अतिथि शिक्षक इस व्यवस्था से प्रभावित होकर बेरोजगारी का सामना कर चुके हैं। कई शिक्षकों की उम्र भी अब नियमित भर्ती के मानकों से बाहर हो चुकी है, जिससे उनके सामने भविष्य का संकट और गहरा गया है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल –
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अस्थायी व्यवस्था का सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है। इस व्यवस्था के चलते हर साल शिक्षकों का बदलना, छात्रों के साथ निरंतरता का अभाव तथा अनुभवी शिक्षकों का सिस्टम से बाहर होना शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
सरकार की चुप्पी, शिक्षक आक्रोशित –
12 माह की सेवा तथा स्थायित्व को लेकर अतिथि शिक्षक लंबे समय से आंदोलनरत हैं, चुनाव आते ही उन्है नेता स्थायीत्व प्रदान करने का लॉली पॉप देकर साध लेते हैं और चुनाव जीतने के बाद फिर वहीं युज एण्ड थ्रो लागू हो जाता हैं। आंदोलनो के बाद भी इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। अतिथि शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थायी नीति नहीं बनाई गई, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अब सीधा सा सवाल यह है कि जब शिक्षा देने वाले ही असुरक्षित हैं, तो भविष्य सुरक्षित कैसे होगा ? अतिथि शिक्षक अब ‘अतिथिÓ नहीं, व्यवस्था की सबसे बड़ी पीड़ा बन चुके हैं।
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