– पवन पाटनी पर हमला, विरोध में व्यापारियों ने 13 मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
– अरनियापीथा मंडी बंद रही, लहसुन मंडी के व्यापारियों ने नहीं बंद की मंडी
जावरा। मंडी के वरिष्ठ व्यापारी पवन पाटनी के साथ हुई मारपीट की घटना ने पूरे व्यापारी वर्ग में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है। जाहीद मेवाती द्वारा की गई इस घटना को व्यापारियों ने न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया, बल्कि मंडी की साख पर सीधा आघात माना है। हालाकि आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया हैं, बावजूद मंडी व्यापारियों का आक्रोश और विरोध जारी हैं। घटना के विरोध में मंगलवार को मंडी अवकाश के बाद व्यापारियों के एक संगठन ने मंडी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एसडीएम एवं मंडी भारसाधक अधिकारी सुनील जायसवाल के नाम ज्ञापन तहसीलदार सहदेव मोरे को सौंपा। विरोध स्वरुप मंगलवार को मंडी बंद के ऐलान में एक मंडी तो बंद रही, लेकिन खाचरौद नाका की लहसुन मंडी चालु रही। ऐसे में व्यापारी के साथ मारपीट के बाद भी एक मंडी का चालु रहना कहीं न कहीं व्यापारियों की एक जूटता पर भी कई सवाल खड़े कर रहा हैं।

व्यापारियों का साफ अल्टीमेटम –
व्यापारी संगठन ने सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए तो अनिश्चितकालीन मंडी बंद की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मंडी प्रशासन की होगी। मंडी व्यापारियों की बैठक में कई कड़े और ठोस निर्णय लिए गए, जिनमें बिना लाइसेंसी हम्माल पर पूर्ण प्रतिबंध, सभी कर्मचारियों के लिए आईडी अनिवार्य, अपराधी हम्मालों पर 1 वर्ष का प्रतिबंध, मंडी में सुरक्षा, तोल कांटे और निगरानी व्यवस्था मजबूत करना, चोरी और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई शामिल हैं।
बड़ा सवाल : क्या व्यापारी खुद ही बंट गए ? –
जहां एक ओर अरनियापीथा मंडी पूरी तरह बंद रही, वहीं खाचरौद नाका स्थित लहसुन मंडी चालू रहने से व्यापारियों की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिसके बाद शहर में अब यह चर्चा जोरों पर है कि जब एक व्यापारी के साथ मारपीट पर भी सभी एक नहीं हुए, तो भविष्य में किसी और के साथ घटना होने पर क्या साथ मिलेगा ?

माहौल गरम, भरोसा कमजोर –
इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मंडी में सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आपसी विश्वास भी कमजोर हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर अभी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे घटनाक्रम बढ़ सकते हैं और मंडी की प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान हो सकता है। ऐसे में मारपीट की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे व्यापारी वर्ग की सुरक्षा और एकता पर बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है। अब निगाहें मंडी प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि मंडी प्रशासन क्या एक्शन लेता हैं।


