– एफडी छुड़ाने के लिए 3 प्रतिशत कमीशन, लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा
– आदेश दबे रहे, अंतत: कलेक्टर ने 17 जुलाई 21 को किया था रिलीव
जावरा। नगरपालिका जावरा का बहुचर्चित रिश्वतकांड अब सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है। रतलाम की विशेष अदालत ने तत्कालीन सीएमओ नीता जैन और लिपिक विजय सिंह शक्तावत को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए चार-चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। फैसले के साथ उस पूरे घटनाक्रम की परतें फिर खुल गईं, जिसमें लोकायुक्त ट्रैप, सीएमओ का रसुख, लंबित आदेश और महीनों तक कुर्सी पर बने रहने की कहानी सामने आई।
एफडी रिलीज के बदले मांगा गया 3 प्रतिशत कमीशन –
शिकायतकर्ता सिविल ठेकेदार पवन भावसार ने नगरपालिका में कई निर्माण कार्य किए — कब्रिस्तान, मालीपुरा नाली, गुलशन टॉकीज की सीसी रोड और रतलामी गेट की नाली। काम के बदले 1,23,000 की सिक्योरिटी एफडी जमा थी, जिसमें करीब 60,000 का भुगतान बकाया था। एफडीआर रिलीज कराने पहुंचे ठेकेदार से कथित रूप से 3 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। बातचीत बाबू विजय सिंह के माध्यम से हुई और करीब 20,000 में डील तय हुई। भावसार ने रिकॉर्डिंग के साथ उज्जैन लोकायुक्त में शिकायत कर दी।
लोकायुक्त का ट्रैप और रंगेहाथ पकड़ाई –
लोकायुक्त टीम ने 500 रुपए के नोटों पर केमिकल लगाकर जाल बिछाया। 12 मार्च 21 को नगरपालिका कार्यालय के बाहर 18,500 रुपए की रिश्वत दी गई। लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव ने 10 सदस्यों की टीम के साथ पहुंचकर दबिश दी और 500 रुपए के 37 नोट बरामद हुए, केमिकल टेस्ट में बाबू के हाथ लाल पाए गए लेकिन यह रकम सीएमओ के लिए आई थी। लोकायुक्त ने नीता जैन को मुख्य आरोपी और विजय सिंह को सह-आरोपी बनाया।
ट्रांसफर आदेश आया, लेकिन लागू नहीं हुआ –
लोकायुक्त ट्रैप के करीब दो महीने बाद 18 मई 2021 को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन उपसचिव डॉ अभिताभ अवस्थी ने आदेश जारी करते हुए सीएमओ नीता जैन को सहायक आयुक्त, नगर निगम उज्जैन तथा बाबु विजय सिंह शक्तावत को नगर पालिका मंदसौर भेज दिया। आदेश शासन की वेबसाइट पर अपलोड हुआ और कलेक्टर को भी भेजा गया, लेकिन लंबे समय तक पालन नहीं हुआ। शहर में चर्चाएं रहीं कि आखिर आदेश क्यों रुका रहा।
ट्रैप के बाद भी 5 महीने पद पर रहीं थी नीता जैन –
इस मामले में सबसे गंभीर बात तो यह थी कि लोकायुक्त ट्रेप होने के बाद दो माह बाद स्थानांतरण आदेश आ गया, लेकिन उसके बाद भी आदेश दबा रहा। जिसके चलते नीता जैन ट्रेप होने के बाद भी करीब 5 माह तक जावरा नपा में ही सीएमओ के पद पर जमी रही और फाईलों पर बदस्तुर हस्ताक्षर करती रही। लोकायुक्त के बुलावे पर भी कई बार पेशी नहीं हुई, जब लोकायुक्त ने जेल भेजने की तैयारी की तो वे वाईस सेम्पल देने उज्जैन पहुंची थी। दबा हुआ स्थानांतरण आदेश ओपन होने के बाद मामले ने तुल पकड़ा तो अंतत: 17 जुलाई 2021 को तत्कालीन कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने नीता जैन को रिलीव किया, तब जाकर जावरा नगरपालिका से उनका कार्यभार हटा।
5 साल बाद कोर्ट का कड़ा फैसला –
करीब पांच वर्षों की सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने रिश्वत मांगना और लेना प्रमाणित माना और दोनों को 4-4 साल कारावास व अर्थदंड से दंडित किया। अब उठ रहे सवाल फैसले के बाद शहर में चर्चा तेज है, ट्रैप के बाद भी अधिकारी पद पर क्यों रहे ? आदेश लागू करने में देरी किसकी जिम्मेदारी ? उस दौरान हुए भुगतान और फैसलों की जांच होगी ? यह मामला जावरा में प्रशासनिक जवाबदेही का उदाहरण बन गया है। सरकारी कुर्सी कुछ समय बचा सकती है, लेकिन कानून से बचाव आखिर संभव नहीं — देर से सही, सजा तय है।
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

