– तहसीलदार से अभद्रता के बाद कर्मचारियों ने भी ठप किया काम, लगाए कार्यालयों पर ताले
– दो वकीलों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग,
– वकीलों ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने तथा मृतक के परिजनों के लिए की मुआवजे की मांग
जावरा। शिवपुरी में अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की हत्या के विरोध में सोमवार को जावरा शहर के सभी अभिभाषक कार्य से विरक्त रहे। आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग को लेकर वकीलों ने प्रशासन को ज्ञापन देने का निर्णय लिया, लेकिन ज्ञापन देने से पहले ही पूरा घटनाक्रम विवाद में बदल गया और मामला प्रशासन-वकील टकराव तक पहुँच गया।
ज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद –
वकीलों ने ज्ञापन देने के लिए एसडीएम सुनील जायसवाल को बुलाया, लेकिन उनके जावरा में उपलब्ध नहीं होने पर तहसीलदार पारस वेश को बुलाया गया। उस समय तहसीलदार कलेक्टर की टीएल बैठक में एसडीएम कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने वकीलों को एसडीएम कार्यालय आकर ज्ञापन देने को कहा, परंतु वकील कोर्ट परिसर में ही ज्ञापन लेने पर अड़े रहे। तहसीलदार ने बैठक समाप्त होने के बाद आने की बात कही, जिससे वकील नाराज हो गए।
कोर्ट चौराहे पर जाम, लगे नारे –
तहसीलदार के देर से आने से आक्रोशित वकीलों ने कोर्ट चौराहे पर जाम लगा दिया और तहसीलदार मुर्दाबाद के नारे लगाए। गुस्साए वकीलों ने रतलाम एडीएम को भी फोन कर शिकायत कर दी। इसके बाद तहसीलदार कलेक्टर से अनुमति लेकर कोर्ट चौराहे पर पहुंचे और ज्ञापन लेने की प्रक्रिया शुरू हुई।
ज्ञापन के दौरान अभद्रता, विवाद बढ़ा –
तहसीलदार के पहुंचते ही कुछ वकीलों ने उनके साथ अभद्रता कर दी, उपस्थित वकीलों मे से दो वकीलों ने तहसीलदार के साथ हद से ज्यादा अभद्रता कर दी। जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और हल्का विवाद भी हुआ। हालांकि स्थिति बिगडऩे के बावजूद तहसीलदार ने वकीलों से ज्ञापन ले लिया। ज्ञापन में आए दिन वकीलो पर हो रहे हमलों के चलते एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किए जाने तथा एक करोड़ के मुआवजे की मांग मध्यप्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से की गई। हालाकि इस मामले में अभिभाषक संघ जावरा अध्यक्ष जगदीश धाकड़ ने बताया कि किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं हुआ हैं, शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन दिया गया हैं।
एफआईआर की मांग, पुलिस ने नहीं किया केस दर्ज –
घटना से नाराज तहसीलदार पारस वेश सीधे शहर थाने पहुंचे और अभिभाषक रमेशचन्द्र शर्मा और राजेश खारीवाल के खिलाफ आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की, लेकिन पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद तहसीलदार ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसडीएम और कलेक्टर को दी तथा दोपहर 3 बजे तक एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सभी तहसीलदारों द्वारा काम बंद करने की चेतावनी दे दी।
कर्मचारियों ने भी बंद किया काम, दफ्तरों पर ताले –
जब यह सूचना एसडीएम व तहसील कार्यालय कर्मचारियों को लगी तो उन्होंने भी तहसीलदार के समर्थन में काम बंद कर दिया। दोपहर 3 बजे तक एफआईआर नहीं होने पर कर्मचारियों ने कार्यालयों पर ताले लगा दिए और शाम को सभी कर्मचारी रतलाम कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध जताने लगे।
देर शाम तक चली बैठक, कलेक्टर बोली एसपी से करंगे चर्चा –
घटना के बाद हालात संभालने के लिए देर शाम तक कलेक्टर के साथ बैठक जारी रही। शहर में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच बने तनाव को देखते हुए स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। इधर तहसीलदारों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रहेगी या नहीं इसका फैसला अभी नहीं हुआ हैं। मामले में कलेक्टर मिशासिंह ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि एसपी अमित कुमार से चर्चा कर मामले में दोनो पक्षों को बैठाकर बात कर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कहीं हैं। ऐसे में मंगलवार को भी सभी तहसीलदार और कर्मचारी संभवत: हड़ताल पर ही रहेंंगे।
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