– परिजनों का आरोप ‘मार डालेंगेÓ की धमकी के बाद हुई मौत, गिरफ्तारी व FIR की मांग पर उग्र प्रदर्शन,
– पुलिस ने 5 लोगों को राउंड-अप किया
जावरा। शनिवार को हरियाखेड़ा में हुई घटना के बाद जावरा में शव रखकर प्रदर्शन हुआ, तो रविवार को भी हाटपिपलिया पुलिस चौकी के बाहर ग्रामीणो ने शव रखकर करीब 5 घंटे तक प्रदर्शन किया। मामला जमीन विवाद से जुड़ा हैं, जिसमें बर्डियागोयल निवासी मोतीलाल प्रजापत (45) की शनिवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई, मौत के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया। चूंकि मामला जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है और परिजनों ने सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों के कारण सदमे में उनकी मौत हुई।
मृतक के परिजनों ने बताया कि मृतक का प्लॉट संबंधी मामला पिछले दो वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था। हाल ही में कोर्ट से अपने पक्ष में आदेश आने के बाद वे निर्माण कार्य शुरू करना चाहते थे, जिसकी सूचना पुलिस चौकी हाटपिपल्या और थाना बड़ावदा को दी गई थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कोई कार्रवाई नहीं की। जब परिवार प्लॉट पर निर्माण शुरू करने पहुंचा तो प्रतिपक्ष से विवाद हो गया। आरोप है कि वहीं पर आरोपियों ने धमकी दी — तुम्हारे परिवार को मार डालेंगे, बताया गया कि खेत से लौटने के बाद मोतीलाल घबराए हुए थे और बार-बार यही बात दोहरा रहे थे। कुछ ही देर में उन्हें खून की उल्टी हुई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम के बाद भड़का गुस्सा –
रविवार को जावरा शासकीय अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ। बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने इस दौरान साफ शब्दों में कहा कि जब तक FIR और गिरफ्तारी नहीं हो जाती तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इसके बाद आक्रोशित लोगों ने शव को हाटपिपल्या चौकी पर रखकर घेराव कर दिया और चक्काजाम कर दिया। करीब 5 घंटे तक सड़क पूरी तरह जाम रही। वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकालना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। प्रदर्शन के दौरान परिजनों और ग्रामिणों ने चेतावनी दी कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
समझाते रहे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी –
प्रदर्शन के दौरान एसडीओपी संदीप मालवीय, थाना प्रभारी स्वराज डाबी, चौकी प्रभारी कुलदीप डाबी और तहसीलदार वैभव जैन लगातार परिजनों को समझाते रहे। लेकिन ग्रामीण नहीं माने, ऐसे में पुलिस ने पांच लोगों को राउंड-अप कर जांच शुरू करने का आश्वासन दिया। करीब दोपहर 3 बजे प्रशासनिक आश्वासन के बाद परिजन माने और चक्काजाम खत्म हुआ। इसके बाद बरडिया गोयल में कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार कराया गया। लेकिन अब भी बड़ा सवाल यह है कि क्या धमकी का सदमा मौत की वजह बना ? पुलिस को पहले सूचना देने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? क्या यह सिर्फ प्राकृतिक मौत है या किसी की जिम्मेदारी तय होगी ? इलाके में यही चर्चा है कि मोतीलाल की मौत का कारण बिमारी थी या डर ?
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