– बरगढ़-भैसाना फंटे रिंग रोड का काम फिर ठप, PMGSY की बनी सड़क खोदकर डाली गिट्टी
— निर्माण से लेकर आज तक अधूरी ‘बायपास’ योजना बनी प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल
जावरा। मुआवज़े की फाइलों में उलझी सरकारी व्यवस्था और ठेकेदार की मनमानी ने एक बार फिर आम जनता को सज़ा दे दी है। पिपलोदा रोड से ग्राम आक्या देह तक पहले से बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की पक्की सड़क को ठेकेदार ने बेरहमी से खोद डाला। ऊपर से मोटी गिट्टी डालकर काम अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और ग्रामीणों को रोज़ जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि ठेकेदार को यह पूरी जानकारी पहले से थी कि कुछ किसानों को अब तक मुआवज़ा नहीं मिला है और वे अपनी जमीन पर काम नहीं करने देंगे। इसके बावजूद ठेकेदार ने बिना तैयारी और सहमति के सड़क खोद दी। नतीजा—काम बंद, सड़क बदहाल और जनता त्रस्त। स्थिति यह है कि कुछ लोगों को मुआवज़ा न मिलने के कारण विरोध शुरू हुआ और निर्माण कार्य फिलहाल पूरी तरह ठप हो गया। ठेकेदार काम रोककर चैन की नींद सो रहा है, जबकि खुदी हुई सड़क से गुजरती जनता हर दिन धूल, गिट्टी और हादसों का सामना कर रही है। दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं, चारपहिया वाहनों के टायर और सस्पेंशन जवाब दे रहे हैं और किसी बड़े हादसे का खतरा लगातार मंडरा रहा है।
मुआवज़े की फाइल आखिर अटकी कहां हैं ? –
अब इस मामले में बड़ा सवाल यह उठ रहा हैं कि अपने निमार्ण के बाद से अब तक अधुरी पड़ी इस सड़क और आक्यादेह के किसानों के मुआवजे वाली फाईल आखिर कहां अटकी हुई हैं। जावरा लोक निर्माण विभाग में या फिर जिला कलेक्टर कार्यालय में या फिर शासन स्तर से ही इसका निराकरण नहीं हो पाया हैं। इसका स्पष्ट जवाब न विभाग के पास है, न प्रशासन के पास। जवाबदेही शून्य है, जबकि परेशानी सौ फीसदी जनता की है, जो वे भुगत रही हैं।
बदले कई ठेकेदार, फिर भी काम अधुरा –
यह पूरा मामला बरगढ़ से भैसाना फंटे तक निर्माणाधीन रिंग रोड से जुड़ा है, जिसमें इसके निर्माण प्रारंभ होने से लेकर अब तक कई ठेकेदारों के हाथ बदल चुका है। कभी जमीन अधिग्रहण अधूरा, कभी किसानों को मुआवज़ा नहीं, कभी फंड की कमी—हर बार नई वजह, हर बार वही नतीजा अधूरी सड़क।
बगैर ओव्हरब्रिज नहीं सफल रिंग रोड़ –
इस रिंग रोड को जावरा शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए बायपास के रूप में विकसित किया जा रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि जब तक भैसाना में रेलवे ओवरब्रिज नहीं बनता, तब तक इस बायपास की सफलता केवल कागजों तक सीमित रहेगी। फिलहाल वहां बना रेलवे अंडरब्रिज बड़े वाहनों के लिए अनुपयोगी है, जिससे भारी ट्रैफिक आज भी शहर के भीतर घुसने को मजबूर है। आज हालात यह हैं कि न सड़क पूरी, न बायपास चालू, न मुआवज़ा मिला—और जवाबदेही किसी की नहीं। सवाल यह नहीं कि गलती किसकी है, सवाल यह है कि इस लापरवाही की कीमत आखिर जनता ही क्यों चुकाए ? अगर समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह सड़क नहीं—आम लोगों के सब्र की परीक्षा बनकर रह जाएगी।
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