जावरा। प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और किसानों की फसलों को हो रहे भारी नुकसान का मुद्दा अब विधानसभा तक पहुंच गया है। जावरा विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय ने बेसहारा गोवंश और नीलगाय की समस्या को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए इसे जनसुरक्षा और कृषि दोनों के लिए गंभीर खतरा बताया।
विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए डॉ. पांडेय ने कहा कि प्रदेश के कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य सड़कों पर आवारा गोवंश का जमावड़ा आम बात हो गया है। रात के समय सड़कों पर बैठे पशुओं के कारण आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, जिससे अनेक लोग घायल हो रहे हैं और कई मामलों में जानलेवा हादसे भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल नगर निकायों की व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए केवल अस्थायी गौशालाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सम्भाग स्तर पर बड़े गो-अभ्यारण बनाए जाने चाहिए, जहां इन पशुओं की समुचित देखभाल, चारा और चिकित्सा की स्थायी व्यवस्था हो सके। इससे एक ओर गोवंश सुरक्षित रहेगा, वहीं सड़कों से भी इनका विचरण कम होगा और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लगेगा।
वन्यजीवों की तरह बनाए नीलगाय के लिए अभ्यारण –
डॉ. पांडेय ने नीलगाय और रोजड़ की बढ़ती संख्या को किसानों के लिए गंभीर संकट बताते हुए कहा कि खेतों में खड़ी फसलें बड़े पैमाने पर बर्बाद हो रही हैं। कई किसानों की पूरी मेहनत एक ही रात में नीलगायों के झुंड द्वारा नष्ट हो जाती है। इतना ही नहीं, ये पशु अचानक सड़क पर आ जाने से बड़े हादसों का कारण भी बन रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिस प्रकार शेर और चीता जैसे वन्यजीवों के लिए संरक्षित क्षेत्र और अभ्यारण बनाए जाते हैं, उसी तर्ज पर नीलगाय व अन्य हानिकारक वन्य पशुओं के लिए भी अलग अभ्यारण घोषित किए जाएं। इससे किसानों की फसलें सुरक्षित रहेंगी और आम नागरिकों की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी। विधायक ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते ठोस नीति नहीं बनाई गई तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। उन्होंने सरकार से शीघ्र व्यापक कार्ययोजना बनाकर लागू करने की मांग की, ताकि किसान, आम नागरिक और पशु — तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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