– 4 साल से नहीं बढ़ी मजदूरी, 16 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
– हम्माल एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन
जावरा। कृषि उपज मंडी अरनियापीठा में काम करने वाले हम्मालों ने अपनी मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इसी कड़ी में मंडी हम्माल एसोसिएशन द्वारा शनिवार को मंडी सचिव के नाम तहसीलदार सहदेव मौरे को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 14 दिन के भीतर मांग पूरी नहीं हुई, तो 16 मई 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इस दौरान मंडी सचिव रंजीत वसुनिया भी मौजुद रहे।
4 साल से ठहरी मजदूरी, बढ़ती महंगाई ने तोड़ी कमर –
हम्मालों का कहना है कि उनकी मजदूरी में आखिरी बार करीब 4 साल पहले वृद्धि की गई थी। तब से लेकर आज तक लगातार महंगाई बढ़ती रही, लेकिन उनकी आय जस की तस बनी हुई है। मौजूदा हालात में इतनी कम मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।
अन्य मंडियों से कम भुगतान, फिर भी सुनवाई नहीं –
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि जावरा मंडी में दी जा रही मजदूरी, रतलाम, मंदसौर और दलौदा जैसी अन्य मंडियों की तुलना में काफी कम है। इस विषय में कई बार मंडी समिति और उच्च अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हम्मालों ने बताया कि 22 अप्रैल 2026 को एसडीएम और मंडी सचिव, तथा 23 अप्रैल को कलेक्टर रतलाम को भी ज्ञापन सौंपा गया था। उसमें 10 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन तय समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।
अब अंतिम चेतावनी : 16 मई से हड़ताल तय –
हालांकि पहले प्रस्तावित हड़ताल को टाल दिया गया है, लेकिन अब एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस ज्ञापन के बाद भी मजदूरी नहीं बढ़ाई गई, तो 16 मई से मंडी में हम्माली का काम पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। यह हड़ताल अनिश्चितकालीन होगी और मांग पूरी होने तक जारी रहेगी।
विवाद टालने के लिए बढ़ाई जाए मजदूरी –
हम्माल एसोसिएशन ने यह भी कहा कि यदि समय रहते मजदूरी नहीं बढ़ाई गई, तो भविष्य में हम्मालों और व्यापारियों के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है। इसलिए नियमों के तहत मजदूरी में वृद्धि करना जरूरी है, ताकि मंडी का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे। जावरा मंडी के हम्माल अब अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से गंभीर और आक्रामक रुख अपना चुके हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर कितना जल्द निर्णय लेता है, क्योंकि 16 मई की तारीख नजदीक है और हड़ताल का खतरा मंडी व्यवस्था पर भारी पड़ सकता है।

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