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Home»मध्यप्रदेश»जावरा»कानून की आड़ में जमीन का खेल ? जावरा में अधिग्रहण पर बवाल
जावरा

कानून की आड़ में जमीन का खेल ? जावरा में अधिग्रहण पर बवाल

EditorBy EditorApril 30, 2026No Comments
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– मियाद खत्म : फिर भी आदेश जारी! किसानों ने कहा—मरी प्रक्रिया को जिंदा कर रहा प्रशासन
– जन संघर्ष समिति ने धारा 11 और 19 को शून्य घोषित करने सौंपा ज्ञापन
– 7 दिन का अल्टीमेटम, नहीं मानी मांगे तो अब कोर्ट जाएगी समिति
जावरा। उज्जैन से जावरा तक बनने नवीन फोरलने की जमीन अधिग्रहण को लेकर एक बार फिर जन संर्घष समिति मैदान में उतर आई हैं। ग्राम भूतेड़ा, सुजावता और बामनखेड़ी सेजावता की कृषि भूमि के अधिग्रहण को लेकर अब मामला गरमा गया है। जन संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन पर कानून को ताक पर रखकर किसानों के साथ अन्याय करने का गंभीर आरोप लगाया है।
समिति ने कलेक्टर के नाम नायब तहसीलदार वैभव जैन को ज्ञापन सौंपते हुए साफ कहा कि धारा-11 की मियाद खत्म होने के बाद उसे बढ़ाना और फिर धारा 19 लागू करना पूरी तरह अवैध और शून्य है।
पहले मियाद खत्म, फिर बढ़ाया समय : यही है विवाद की जड़ –
समिति के अनुसार धारा-11 का प्रकाशन 21 नवंबर 2024 को हुआ था। कानून के मुताबिक धारा-19 का प्रकाशन 21 नवंबर 2025 तक अनिवार्य था। लेकिन प्रशासन ने 55 दिन बाद (15 जनवरी 2026) अचानक नोटिस निकालकर धारा-11 की अवधि 6 महीने बढ़ा दी, ऐसे में अब सवाल यह हैं कि ब प्रक्रिया खत्म हो चुकी थी, तो उसे दोबारा जिंदा कैसे किया गया ?बिना सुनवाई आदेश : प्राकृतिक न्याय की हत्या –
समिति का आरोप है कि पहले से दर्ज आपत्तियों पर कोई सुनवाई नहीं हुई, इस मामले में किसानों को सूचना तक नहीं दी गई, जिला प्रशासन ने सीधे एकतरफा आदेश जारी कर दिया। इसे समिति ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का खुला उल्लंघन बताया है।
18 महीने से फंसे किसान : न जमीन बिक रही, न लोन मिल रहा –
यह मामला सिर्फ कागजी नहीं जमीन पर इसका असर साफ दिख रहा है, ऐसे में किसान अपनी जमीन बेच नहीं पा रहे हैं, बैंक से लोन नहीं मिल रहा हैं, जिसके चलते रोज़मर्रा की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पडऩे लगा हैं। समिति का आरोप है कि यह किसानों के जीविकोपार्जन के मौलिक अधिकार का हनन है।
धारा-19 भी विवाद में : समय से पहले क्यों ?
समिति सदस्यों ने बताया कि अगर 6 महीने की बढ़ी अवधि को मान भी लिया जाए, तो अंतिम तिथि बनती है 21 मई 2026 लेकिन प्रशासन ने 29 अप्रैल 2026 को ही धारा 19 प्रकाशित कर दी, जो कि कानून के खिलाफ है।4 बड़ी मांगें, 7 दिन का अल्टीमेटम –
जन संघर्ष समिति ने प्रशासन के सामने 4 प्रमुख व बड़ी मांगे रखी हैं। जिनमें 15 जनवरी 2026 का आदेश तुरंत निरस्त करने, लंबित आपत्तियों पर खुली सुनवाई किए जाने, तय समय तक धारा-19 न होने पर अधिग्रहण खत्म होने का प्रमाण पत्र दिया जाने के साथ ही भविष्य में किसानों को पूर्व सूचना और सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित करना शामिल हैं।
अब कोर्ट की तैयारी –
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो मामला सीधे उच्च न्यायालय जबलपुर पहुंचेगा। प्रशासन किसानों की जमीन हड़पने के लिए कानून को तोड़-मरोड़ रहा है। धारा-11 और 19 की पूरी प्रक्रिया शून्य है। ऐसे में जावरा में यह मामला अब सिर्फ जमीन अधिग्रहण का न होकर कानून बनाम किसान और प्रशासन बनाम अधिकार की लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।
इनकी रही उपस्थिति –
गुरुवार को जावरा एसडीएम कार्यालय पर ज्ञापन सौंपते समय जन संषर्घ समिति के सुनील पोखरना, मनोज मेहता, रंजीत सिंघल, राजेश कोठारी, उबेद अंसारी, गुड्डू पठान, फरजाना खान, असलम मेव, जीतू मालवीय, दिनेश नायमा, जगदीश सोलंकी, आर.डी. धाकड़, मुकेश धाकड़, राधेश्याम पाटीदार, अब्बास बोहरा, नरेंद्र सेठिया, फरीद हुसैन, सिकंदर मेव, नागेश्वर पाटीदार, धर्मेंद्र, विकास सहित समिति सदस्य उपस्थित रहे।

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