-8 साल पुराने मामले में आया फैसला, नोटबंदी-GST का बहाना बनाकर टालते रहे भुगतान
जावरा। शहर के बहुचर्चित करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। गेहूं व्यापार में मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर करीब 12 करोड़ 90 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपियों को न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश परमानन्द चौहान ने दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस प्रकरण के निर्णय के बाद जावरा में मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।
भरोसा जीतकर शुरू किया खेल –
मामले की शुरुआत 21 अगस्त 2019 को हुई, जब शहर थाना जावरा में फरियादी मोहम्मद इरफान पिता अजीज मोहम्मद ने लिखित शिकायत दी। उसने बताया कि आरोपी विजय पोरवाल ने गेहूं के बड़े व्यापार का प्रस्ताव रखा और कहा कि माल खरीदने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत है। बदले में 9 से 10 प्रतिशत मुनाफा देने का लालच दिया गया। अप्रैल 2015 में व्यापार शुरू कराया गया। शुरुआत में समय पर मुनाफा देकर विश्वास बनाया गया तथा बाद में लगातार बड़ी रकम ली जाती रही, रकम आरोपियों के रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। फरियादी के अनुसार अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक करीब 12.90 करोड़ रुपये उससे ले लिए गए।
नोटबंदी और GST बना बहाना –
जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 की नोटबंदी और बाद में त्रस्ञ्ज लागू होने के बाद आरोपी ने भुगतान टालना शुरू कर दिया। कभी नए टेंडर आने, कभी माल खरीदने और कभी व्यापार विस्तार का बहाना बनाकर और रकम ली जाती रही। जब फरियादी ने पैसा वापस मांगा तो एक लिखित अनुबंध भी तैयार किया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
फर्जी बिलों से किया करोड़ों का खेल –
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सभी आरोपी आपस में रिश्तेदार थे और संगठित तरीके से काम कर रहे थे। फरियादी से लिए गए पैसे को वैध दिखाने के लिए फर्जी बिल और कूट रचित दस्तावेज तैयार किए गए। इस पर पुलिस थाना शहर जावरा ने आरोपियों पर धारा 420, 406 BNS में प्रकरण दर्ज किया। अभियुक्त विजय पोरवाल द्वारा अपने मेमोरेण्डम मे बताया कि उसके द्वारा जगदीश पिता कैलाशचंद्र पोरवाल निवासी 12, ओझा मार्ग नागदा, सुरेन्द्र पिता कन्हैयालाल पोरवान निवासी 12, ओझाा मार्ग नागदा, पिंकी पति शम्भुदयाल पोरवाल निवासी 08, ओझा मार्ग नागदा, शम्भुदयाल पिता रामेश्वर पोरवाल निवासी 07, ओझा मार्ग नागदा, गोपालकृष्ण उर्फ गोपाल पिता सुरेन्द्र कुमार पोरवाल निवासी 09, ओझा मार्ग नागदा, राजकुमार पिता मांगीलाल पोरवाल निवासी 93, कोठी बाजार जावरा, अल्का पति राजकुमार पोरवाल निवासी 93, कोठी बाजार जावरा व पंकज पोरवाल पिता बद्रीलाल पोरवाल निवासी कोठी बाजार जावरा, मोहम्मद शाकीर पिता मोहम्मद साबिर आयु 45 वर्ष जाति छिपा निवासी मकान नम्बर 32, खत्रीपुरा जावरा आपस मे मिले हुए है ओर इनके द्वारा फर्जी बिल तैयार किये गये जिसमे प्रकरण की विवेचना के दौरान धारा 467, 468, 34 भारतीय दण्ड विधान का इजाफा किया गया और उपरोक्त सभी को प्रकरण मे आरोपी बनाया गया तथा आरोपियों के खिलाफ चालान न्यायालय में पेश किया।
मामले में किन-किन को मिली सजा –
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने धारा 420 व 120-बी (धोखाधड़ी व आपराधिक षड्यंत्र) रचने पर राजकुमार, शंभुदयाल, जगदीश, गोपालकृष्ण उर्फ गोपाल, सुरेन्द्र को 5-5 वर्ष सश्रम कारावास तथा 10 हजार के अर्थदण्ड से दण्डित किया हैं। साथ ही धारा 467 व 120-बी (फर्जी दस्तावेज/कूट रचना) के मामले में राजकुमार, शंभुदयाल, अल्का तथा पिंकी को 5-5 वर्ष सश्रम कारावास की सजा से दण्डित किया हैं। मामले के अन्य आरोपी शाकीर व पंकज फरियादी से समझौता होने के कारण पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं। वहीं मुख्य आरोपी विजय पोरवाल की विचारण के दौरान मृत्यु हो चुकी हैं। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक समरथ साहू ने की
क्षेत्र में बना चर्चा का विषय –
करीब 8 वर्ष पुराने इस आर्थिक अपराध में आए फैसले को जावरा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी रकम के निवेश, रिश्तेदारों की संगठित भूमिका और फर्जी बिलों के जरिए ठगी करने का यह मामला स्थानीय व्यापारिक वर्ग के लिए भी चेतावनी माना जा रहा है।
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