– जिला स्तर से जारी हुई सूचि में दर्शाए गए 85 प्रतिशत अंक, जबकि अंक सूचि में महज 57 प्रतिशत अंक
– जिम्मेदार कोन …. ? आवेदिका, स्थानीय अधिकारी या जिला स्तर से हुई गड़बड़ी
शैलेन्द्रसिंह चौहान, जावरा/रतलाम।
मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 4767 पदों पर चल रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती अब बड़े विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक के ग्राम केरवासा से सामने आया एक मामला अब पूरे प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रदेशभर में जहां हजारों महिलाएं वर्षों की मेहनत और वास्तविक अंकों के आधार पर नौकरी की उम्मीद लगाए बैठी हैं, वहीं जावरा की मेरिट सूची में सामने आई कथित गड़बड़ी ने भर्ती में सेटिंग की आशंकाओं को हवा दे दी है।
प्रदेश में हजारों पद, रतलाम में 100 से ज्यादा भर्ती — अब मेरिट पर उठे सवाल –
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही है। रतलाम जिले में भी कार्यकर्ता और सहायिक के करीब 119 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है, जिनमें जावरा ब्लॉक के कई गांव शामिल हैं। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला स्तर से जारी मेरिट सूची में ही इतनी बड़ी विसंगति सामने आ सकती है, तो पूरे प्रदेश की सूचियों की निष्पक्षता पर भरोसा कैसे किया जाए ?
डेटा कुछ और, मेरिट सूची कुछ और ! –
जावरा ब्लॉक के ग्राम केरवासा की जारी मेरिट सूची में प्रथम स्थान पर दिखाई गई महिला अभ्यर्थी को 85 प्रतिशत अंक के साथ टॉपर दर्शाया गया है। लेकिन जब संबंधित महिला के कक्षा 12वीं के रोल नंबर की जांच की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एमपी बोर्ड की वेबसाइट पर अंक निकले 288/500, राज्य शिक्षा केंद्र (D.El.Ed पोर्टल) पर भी अंक दिखे 288/500 यानी दोनों सरकारी प्लेटफॉर्म पर महिला के अंक लगभग 57 प्रतिशत ही सामने आए।
मेरिट की अंक गणना में गड़बड़ –
भर्ती को लेकर जिला स्तर से जारी गई केरवासा की मेरिट लिस्ट में प्रथम स्थान पाने वाली महिला की मेरिट की गणना में जाति के 5 अंक, बीपीएल कुपन के 5 अंक, 12 वीं में 85.2 प्रतिशत का 1/3 अंक के हिसाब से 47.6 अंक तथा स्नातक उत्तीर्ण के 10 अंक जोड़कर कुल 67.6 प्रतिशत अंकों के साथ गांव में मेरिट सूची में प्रथम स्थान पर पहुंचा दिया गया। लेकिन वास्तविकता में यदि 12 के 57 प्रतिशत अंको के हिसाब से गणना की जाए तो मेरिट में प्रथम स्थान आना संभव नहीं हैं। फिर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मेरिट सूची में 85 प्रतिशत अंक आए कहां से ? क्या यह सिर्फ गलती है ? या भर्ती घोटाले की शुरुआत ? 57 प्रतिशत और 85 प्रतिशत के बीच का अंतर कोई मामूली त्रुटि नहीं माना जा सकता। यह सीधा मेरिट क्रम बदलने वाला अंतर है।
ऐसे में अब तीन गंभीर सवाल उठ रहे हैं –
– क्या आवेदिका द्वारा गलत अंकसूची प्रस्तुत की गई ?
– क्या स्थानीय अधिकारियों ने दस्तावेज सत्यापन में भारी लापरवाही की ?
– या फिर किसी मोटे लेन-देन के चलते मेरिट में हेरफेर किया गया ?
क्या बिना मिली भगत के यह संभव हैं ? –
बिना मिलीभगत के इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव नहीं लगती। छोटे गांव से उठा मामला, अब प्रदेश स्तर तक पहुंचने की संभावना हैं। केरवासा जैसे छोटे गांव की सूची में यह मामला सामने आने के बाद अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर एक गांव की सूची में 57 प्रतिशत को 85 प्रतिशत बनाया जा सकता है, तो प्रदेशभर की हजारों भर्तियों में क्या स्थिति होगी ? विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक तकनीकी गलती नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया की मॉनिटरिंग और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
जिम्मेदारी किसकी ? ग्राम से जिला स्तर तक घेरे में अधिकारी –
यह मेरिट सूची जिला स्तर से जारी हुई है। ऐसे में जिम्मेदारी केवल ग्राम या परियोजना स्तर तक सीमित नहीं रह जाती। अब सवालों के घेरे में स्थानीय सत्यापन अधिकारी, परियोजना कार्यालय, जिला महिला एवं बाल विकास विभाग और मेरिट अनुमोदन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी भी हैं। क्योंकि अंतिम सूची जारी होने से पहले दस्तावेजों का सत्यापन और क्रॉस चेक होना अनिवार्य माना जाता है।
योग्य अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी –
भर्ती में शामिल अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि वास्तविक अंकों के बजाय मैनेजमेंट के आधार पर मेरिट बनेगी तो मेहनत करने वाले उम्मीदवारों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। कई अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और न्यायालय का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल –
क्या विभाग इस मामले को तकनीकी त्रुटि बताकर दबाने की कोशिश करेगा ? या फिर पूरे प्रदेश की मेरिट सूचियों की निष्पक्ष जांच कराकर पारदर्शिता साबित करेगा ? क्योंकि अब यह मामला सिर्फ केरवासा गांव तक सीमित नहीं रहा, यह मध्यप्रदेश की पूरी आंगनवाड़ी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।
(Jaora Headlines Investigation Desk)
📩 यदि आपके पास भी भर्ती से जुड़े दस्तावेज, स्क्रीनशॉट या शिकायत है, तो हमें भेजें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।


