– कार्रवाई नहीं करने पर पुलिस भी कटघरे में, रोड जाम की चेतावनी
जावरा। समीप स्थित ग्राम हरियाखेड़ा में एक मजदूर युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मृतक लक्ष्मीचंद्र पिता कनीराम भील समाज ने गांव की पानी की टंकी पर रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने सरपंच तथा औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उल्लेखनीय है कि हरियाखेड़ा सरपंच को पूर्व में भी ईओडब्ल्यू ने भी रिश्वत में मामले में ट्रेप किया था।
ग्रामीणों के अनुसार मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें सरपंच सहित तीन लोगों के नाम लिखे बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, मृतक ने फांसी लगाने से पहले टंकी की सीढिय़ों पर भी आरोपियों के नाम और पुलिस नहीं सुनती लिख दिया था। आरोप है कि बाद में सरपंच या पुलिस के कहने पर गांव के चौकीदार वहां लिखे नाम मिटा दिए। जिससे मामला और अधिक शंका के घेरे में पहुंच गया हैं। इधर सीएसपी युवराजसिंह चौहान ने बताया कि मर्ग कायम किया हैं, मामला जांच में हैं, जांच उपरांत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पहले शिकायत, फिर मौत –
जानकारी के अनुसार लक्ष्मीचंद्र गांव के सरपंच जितेंद्र पाटीदार के खेत पर मजदूरी करता था। बताया जा रहा है कि 11 फरवरी की रात करीब 1 बजे वह खेत में फसल को पानी दे रहा था, तभी कुछ लोग खेत पर आए और उसके साथ मारपीट की। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद सरपंच ने उल्टा मृतक पर ही चोरी का आरोप लगाकर थाने में बंद करवा दिया। जमानत मिलने के बाद युवक ने सरपंच और उनके परिवार के तीन लोगों के खिलाफ औद्योगिक क्षेत्र थाने में आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मृतक ने बाद में रतलाम एसपी कार्यालय में भी शिकायत भेजी, पर सुनवाई नहीं होने से वह लगातार तनाव में था।
आवेदन में मारपीट और जातिसूचक गालियों का आरोप –
12 फरवरी को दिए गए अपने लिखित आवेदन में लक्ष्मीचंद्र ने आरोप लगाया था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया, सरपंच पक्ष के लोगों और पुलिस ने मारपीट की, जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। थाने में रातभर पीटा गया और दबाव बनाया गया कि किसी और का नाम ले ले, उसने अपनी शिकायत में लिखा था कि सरपंच के प्रभाव के कारण पुलिस उसकी बात नहीं सुन रही और उसे गंभीर धमकियां दी जा रही हैं।
टंकी पर लिखा नाम बना सबूत ? –
ग्रामीणों का कहना है कि फांसी लगाने से पहले युवक ने टंकी पर साफ-साफ सरपंच लिखा था। इसी कारण घटना के बाद गांव में आक्रोश फैल गया। टंकी के चढ़ाव पर भी साफ साफ सरपंच लिखा दिखाई दे रहा हैं, वहीं टंकी ऊपर भी जिसमें पुलिस नहीं सुनती हैं लिखा हैं। सुबह सुबह इस घटना से गांव में तनाव का माहोल बन गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए जावरा के सरकारी अस्पताल भेजा। जहां भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।
आक्रोशित ग्रामीणों ने दी चेतावनी –
परिजन और ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार लोगों पर तुरंत केस दर्ज नहीं हुआ तो पोस्टमार्टम के बाद पीपलोदा रोड जाम किया जाएगा।
जांच के घेरे में पुलिस –
इस पूरे मामले में अब दो बड़े सवाल खड़े हो गए हैं यदि युवक ने पहले से शिकायत दी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? क्या वाकई दबाव में आकर पुलिस ने मामले को दबाया ? फिलहाल पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है, लेकिन गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और प्रशासन के लिए यह मामला कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बनता दिख रहा हैं। मामले में सीएसपी युवराजसिंह चौहान का कहना है कि फिलहाल मृग कायम हुआ हैं, मामले में जांच की जाएगी, जांच उपरांत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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