– नपा ने पठान टोली के एक खतरनाक भवन को गिराया गया
– लेकिन शहर में 37 जर्जर भवन चिन्हित होने के बावजूद बाकी पर कार्रवाई का इंतजार
– नागरिकों ने सभी खतरनाक भवनों को हटाने की मांग उठाई।
जावरा। बरसात के मौसम में जर्जर मकानों से होने वाले संभावित हादसों को देखते हुए नगर पालिका परिषद जावरा ने आखिरकार एक खतरनाक भवन पर कार्रवाई करते हुए पठान टोली स्थित जीर्ण-शीर्ण मकान को ध्वस्त कर दिया। यह कदम निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि जब नगर पालिका स्वयं 37 जर्जर भवन चिन्हित कर चुकी है, तो क्या कार्रवाई सिर्फ एक भवन तक सीमित रहेगी या बाकी खतरनाक भवनों पर भी बुलडोजर चलेगा?
मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार जीर्ण-शीर्ण भवनों को हटाने की कार्रवाई के तहत शनिवार को नगर पालिका परिषद जावरा ने पठान टोली क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत जर्जर भवन को गिरा दिया। नगर पालिका के अनुसार यह भवन कभी भी ढह सकता था और जन-धन की हानि का कारण बन सकता था। यह कार्रवाई मुख्य नगर पालिका अधिकारी चंद्रशेखर सोनिस एवं नोडल अधिकारी महेशचंद्र सोनी (उपयंत्री) के निर्देश पर प्रभारी इमरानउद्दीन कुरैशी और प्रभारी समयपाल शैलेन्द्र सिंह सोलंकी की मौजूदगी में की गई। नगर पालिका अधिकारियों ने बताया कि निकाय क्षेत्र के सर्वे में 37 जर्जर भवनों की पहचान की गई है। सभी भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर स्वयं भवन हटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सवाल जो उठ रहे हैं –
नगर पालिका की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन शहरवासियों का कहना है कि हर साल केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है। यदि प्रशासन ने इस बार एक भवन पर कार्रवाई शुरू की है तो उसे बाकी चिन्हित भवनों पर भी समान सख्ती दिखानी होगी। बरसात के दौरान जर्जर मकानों के गिरने की घटनाएं कई शहरों में जानलेवा साबित हो चुकी हैं। ऐसे में यदि किसी बड़े हादसे का इंतजार किया गया तो इसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।
जनहित का मुद्दा –
शहर के कई मोहल्लों और मुख्य बाजारों में आज भी ऐसे भवन खड़े हैं जो कभी भी ढह सकते हैं। नगर पालिका को केवल नोटिस जारी करने तक सीमित न रहकर सभी चिन्हित भवनों पर समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। जनहित में यह आवश्यक है कि बारिश के बीच किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले ही खतरे को खत्म किया जाए।
Jaora Headlies की बात –
एक भवन पर हुई कार्रवाई स्वागत योग्य है और इसे शहर की सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर माना जा सकता है। लेकिन यदि शेष 36 जर्जर भवनों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह अभियान अधूरा रह जाएगा। अब शहरवासियों की नजर नगर पालिका पर है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है या फिर कार्रवाई एक भवन तक ही सिमट जाएगी।


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