– न कलेक्टर ने सुनी मांगें, न प्रदर्शनकारियों को जाने दिया कार्यालय
— यात्री परेशान, प्रशासन पर तानाशाही और पुलिस पर बंदी के गंभीर आरोप
– जनहित के 11 मुद्दों पर सुलगा रह रतलाम
रतलाम/जावरा। जनहित के 11 गंभीर मुद्दों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रशासन के अडिय़ल रवैये के चलते और मजबूत होता जा रहा है। करणी सेना परिवार प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर पिछले 24 घंटे से अपने समर्थकों के साथ जावरा-रतलाम फोरलेन पर धरने पर डटे हुए हैं, लेकिन अब तक न तो कलेक्टर ने उनकी मांगें सुनी हैं और न ही कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा है।
आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने जीवनसिंह और उनके साथियों तथा पीडि़तों को कलेक्टर कार्यालय तक जाने से रोक दिया, इतना ही नहीं प्रशासन और पुलिस ने रतलाम पहुंचने हर मार्ग पर ब्लॉक कर दिया हैं। ऐसे में न तो जीवनसिंह को कलेक्टर ऑफीस जाने दिया जा रहा हैं और ना कलेक्टर मिशा सिंह भी खुद मौके पर पहुंचीं। इससे आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है और इसे जिला कलेक्टर का अडिय़ल और तानाशाही रवैया बताया जा रहा है।
यातायात हो रहा प्रभावित –
धरने के चलते फोरलेन पर यातायात प्रभावित हो रहा है, जिससे आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ऐसे में फोरलेन पर कई पीडि़त और जीवनसिंह के साथ उनके समर्थक तंबु लगाकर बैठे हैं, धरना स्थल पर ही वे सभी रात भर डटे रहे, अपने समर्थकों के लिए जीवनसिंह ने स्वयं अपने हाथों से पुडिय़ा बनाकर साथियों को खिलाई और स्वयं भी खाकर धरना स्थल पर ही रात बिताई।
प्रशासन पर गंभीर आरोप, आंदोलन और तेज होने के संकेत –
धरना स्थल से जीवनसिंह शेरपुर ने पुलिस और प्रशान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस पर शराब ठेकेदारों से बंदी (वसूली) लेने के आरोप लग रहे हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होना चाहिए। वहीं बाछड़ा समुदाय से भी बंदी लेने की बात कहीं जा रही हैं। वहीं खनिज विभाग द्वारा आयुष शर्मा पर की गई कार्रवाई को भी गलत बताते हुए मनमानी और दबाव में प्रशासन द्वारा काम किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जीवनसिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक कलेक्टर स्वयं आकर उनकी मांगें नहीं सुनतीं और उन पर ठोस कार्रवाई नहीं करतीं, तब तक वे धरने से नहीं उठेंगे।
24 घंटे बाद भी प्रशासन की चुप्पी –
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 24 घंटे बीत जाने के बावजूद न तो कोई संक्षम अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही वार्ता की पहल की गई। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालाकि मंगलवार को एडीएम पहुंची थी, लेकिन उनके साथ वार्ता विफल रही, प्रदर्शनकारी जिला कलेक्टर मिशासिंह से ही मिलकर उनसे चर्चा करने की मांग पर अड़े हैं, उनका कहना है कि या तो कलेक्टर यहां आकर उनसे मिले या उन्है अपने समर्थकों के साथ कलेक्टर कार्यालय तक जाने दे।
कलेक्टर के अडिय़ल रवैये के खिलाफ जनआक्रोश –
ऐसे में अब यह आंदोलन केवल मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कलेक्टर के अडिय़ल रवैये के खिलाफ जनआक्रोश का रूप ले चुका है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और मजबूत होने की पूरी संभावना है।
ये हैं जनहित के 11 प्रमुख मुद्दे जिन पर आंदोलन जारी हैं –
– खनिज विभाग द्वारा अवैध उत्खनन के नाम पर खाली डंपरों पर फर्जी प्रकरण दर्ज करने के मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई।
– ग्राम पिपलिया जोधा में अवैध देह व्यापार बंद कर मारपीट के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई।
– ग्राम नेगरून की दो माह से लापता नाबालिग बालिका की जल्द खोज और दोषियों पर कार्रवाई।
– जिले में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर रोक और अवैध वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई।
– ग्राम बोरवनी में चल रहे ईंट भट्टे को हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित करना।
– जावरा की अम्बिका सिटी कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना और कॉलोनाइजर पर कार्रवाई।
– जिले में कई गावों में वर्षों से रह रहे परिवारों को हटाने के बजाय स्थायी पट्टा देना।
– किसानों के कर्ज जमा करने की अंतिम तारीख 28 मार्च से बढ़ाकर 15 मई करना।
– गेहूं खरीदी पंजीयन में सर्वर समस्या दूर कर पंजीयन तिथि बढ़ाना।
– नगरपालिका जावरा द्वारा 2017 से लंबित भूमिहीनों को 10,000 के बदले पट्टा देना।
– क्षेत्र में चल रही अन्य अवैध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई और आमजन को राहत।
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