– समय पर नहीं मिल रहा दान पेटी का हिसाब, 10 किलो चांदी में भी गड़बड़ी के आरोप
– लंबे समय से निवासरत संदिग्धों की जांच की भी उठाई मांग
जावरा। प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध दरगाह स्थलों में शामिल हुसैन टेकरी शरीफ, जहां रोज़ाना दूर-दराज़ से हजारों श्रद्धालु अपनी पीड़ा और उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, अब व्यवस्थाओं को लेकर कठघरे में आ गया है। आस्था के इस बड़े केंद्र पर पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने माहौल गरमा दिया है।
समाजसेवी शब्बीर डैनी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर टेकरी में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्थानीय विधायक और सांसद को भी पूरे मामले से अवगत कराया है। डैनी का आरोप है कि जिस स्थान पर लोगों की श्रद्धा और दान से व्यवस्थाएं चलती हैं, वहीं आय-व्यय का खुला हिसाब सामने नहीं रखा जा रहा।
नहीं मिल रहा दान पेटी का हिसाब –
उनका कहना है कि पूर्व कमेटी नियमित रूप से गल्ले (दान राशि) का हिसाब देती थी, लेकिन वर्तमान कमेटी द्वारा सार्वजनिक लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया जा रहा। इतना ही नहीं, पूर्व कमेटी द्वारा जमा कराई गई 10 किलो से अधिक चांदी का भी स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
करवाया जाए रहवासियों का सत्यापन –
डैनी ने मांग की है कि पिछले 12 से 15 वर्षों से टेकरी परिसर में रह रहे लोगों का सत्यापन कराया जाए। साथ ही वक्फ बोर्ड द्वारा 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त किए गए 13-14 मुआजिरों एवं चौकीदारों में से जुल्फिकार रहमान को कथित रूप से बिना प्रक्रिया पुन: नियुक्त किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि गरीबों को हटाकर प्रभावशाली लोगों को फिर से रखना न्याय नहीं, व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है।
वक्फ भूमि में हेर फेर के लगाए आरोप-
बामनखेड़ी की वक्फ भूमि को लेकर भी उन्होंने हेराफेरी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पूर्व कमेटी ने वक्फ हित में राजीनामा करने से इंकार किया था और मामला वक्फ बोर्ड को भेजने की बात कही थी, लेकिन वर्तमान कमेटी द्वारा राजीनामा कर लिया गया। उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
डैनी ने तुलना करते हुए कहा कि सांवरिया सेठ मंदिर में दान और सोने का हिसाब सार्वजनिक किया जाता है, जबकि हुसैन टेकरी में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है।
जावरा विधायक से भी की मांग –
उन्होंने जावरा विधायक से मांग की कि इतने बड़े और संवेदनशील तीर्थ स्थल पर प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यहां आईएएस स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि यहां केवल मुस्लिम ही नहीं, बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु भी आस्था के साथ पहुंचते हैं, इसलिए व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।
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