– गीता भवन से सुबह 10 बजे निकलेगी कलश यात्रा, जनता परिसर में होगी कथा की शुरुआत
– 21 से 27 अगस्त तक दोपहर 1 से 4 बजे तक कथा का आयोजन
जावरा। धर्म और आध्यात्म की नगरी जावरा में श्रद्धा एवं भक्ति का वातावरण बनने जा रहा है। “सबका कल्याण” अग्रवाल परिवार, जावरा के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ शुक्रवार, 21 अगस्त को भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। कथा का आयोजन खाचरौद रोड स्थित जनता परिसर, जावरा में किया जाएगा।
कथा के शुभारंभ अवसर पर शुक्रवार सुबह 10 बजे गीता भवन से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकलने वाली यह यात्रा गीता भवन से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए खाचरौद रोड स्थित जनता परिसर पहुंचेगी, जहां कलश यात्रा का समापन होगा और इसके पश्चात श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा।
सात दिनों तक बहेगी भक्ति की रसधार –
आयोजकों के अनुसार श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 21 अगस्त से 27 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक किया जाएगा। कथा का वाचन एवं आध्यात्मिक प्रवचन परम पूज्य भीमारंकर जी शास्त्री (धारियाखेड़ी वाले) के श्रीमुख से होगा। सात दिवसीय कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेश, भक्ति, धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय सनातन संस्कृति और श्रीमद्भागवत के जीवनोपयोगी संदेशों से जुडऩे का अवसर मिलेगा।
कलश यात्रा में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब –
श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व निकाली जाने वाली कलश यात्रा को लेकर आयोजकों द्वारा तैयारियां की गई हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यात्रा में शामिल होने की संभावना है। कलश यात्रा के दौरान धार्मिक वातावरण और भक्ति के रंग में पूरा माहौल सराबोर नजर आएगा। आयोजकों ने धर्मप्रेमी नागरिकों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कलश यात्रा में शामिल होकर कथा के शुभारंभ अवसर के साक्षी बनें तथा सातों दिन कथा श्रवण का लाभ लें।
आयोजकों ने की अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील –
“सबका कल्याण” अग्रवाल परिवार की ओर से समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं, माताओं-बहनों एवं श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा में सादर आमंत्रित किया गया है। आयोजकों ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला आध्यात्मिक अवसर है। इसलिए नगर एवं आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालु अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का लाभ लें।

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