– महामंडलेश्वर १००८ मधुसूदनानंद महाराज ने कहा
– मां अन्नपूर्णा धाम सेमलिया पहाड़ी पर २ वर्षो से जारी रुद्र चंडी यज्ञ, तीसरे वर्ष में कर रहा प्रवेश
जावरा। जावरा का कोई अर्थ नहीं … से नाम अंग्रेजों और मुगलों ने दिया था, इसे बदलकर सनातक आधारित कोई नया नाम देने की आवश्यकता है, उज्जैन नाम का उल्लेख शास्त्रों में हैं। रतलाम का नाम वहां के महाराजा रतनसिंह के नाम पर आधारित हैं वैसे ही जावरा का भी अर्थ होना चाहिए। सनातन धर्म में नामकरण संस्कार का बहुत महत्व है, हर नाम की अपनी एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहचान होती है बाहरी लोगो के द्वारा थोपे गये नाम बदलना चाहिए। तीन अक्षर का नाम होने से अंक ज्योतिष के अनुसार भी ये सही नहीं हैं।
यह बात रविवार को मीडिया में बयान जारी करते हुए महामंडलेश्वर 1008 मधुसूदनानंदजी महाराज ने कही, उल्लेखनीय है कि मां अन्नपूर्णा धाम सेमलिया पहाड़ी पर 2 वर्षों से रुद्र चंडी यज्ञ कर रहे महामंडलेश्वर ने तीसरे वर्ष भी यज्ञ जारी रखने का संकल्प लिया हैं। मीडिया से रुबरु होते हुए महामंडलेश्वर ने कहा कि बाहर से आने वाले भक्त जावरा नाम का अर्थ व इतिहास पुछते हैं जबकि जावरा नाम का कोई अर्थ ही नहीं हैं वहीं इतिहास में तो अंग्रेजो व मुगलों द्वारा जावरा नाम रखने की जानकारी हैं, इसलिए अब जावरा नाम को बदलकर सनातन पर आधारित नाम नाम रखने की आवश्यकता हैं। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं व सनातन समर्थक राजनेताओं से अपील की हैं कि जावरा का नाम बदलने के लिए वे प्रयास शुरू करें।
500 वर्षो पहले मेवाड़ से आए सोलंकी ठाकुरों का राज था –
महामंडलेश्वर ने जावरा का नाम बदलने की मांग के आधार बताते हुए कहा कि 500 वर्ष पहले इस क्षेत्र में मेवाड़ से आए सोलंकी ठाकुरों का राज हुआ करता था। उसके बाद होल्कर, अंग्रेजों व मुगलों का शासन रहा। 1818 में अंग्रेजों व होल्करों के बीच युद्ध में जो संधि हुई तब इस क्षेत्र को मुगल रियासत जावरा का नाम दिया था, इसलिए जावरा नाम का कोई स्पष्ट अर्थ भी नहीं हैं, वहीं शासन के रिकार्ड अंग्रेजी में छ्व्रह्रक्र्र (जाओरा) लिखा जाता हैं। यानि हिंदी और अंग्रेजी दोनों में नाम बदला हुआ हैं।
महाकाल वन क्षैत्र की सीमा में बसा है जावरा –
शास्त्रों में उल्लेखित विक्रमादित्य की नगरी व महाकाल वन क्षेत्र की सीमा यहां जावरा तक थी यानी ये क्षेत्र महाकाल वन क्षेत्र की बाउंड्री में शामिल हैं। जैन समाज के दादागुरु राजेंद्रसूरिश्वरजी महाराज की क्रियोद्धार स्थली भी यही है। ऐसे में अब समय आ गया हैं कि जावरा का नाम बदलकर सनातन आधारित नाम रखना चाहिए। सामाजिक संस्थाए, सनातन समर्थक राजनेताओं को जावरा का नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू करना चाहिए।
विश्व शांति के जारी रुद्र चंडी यज्ञ का तीसरा साल शुरु –
महामंडलेश्वर 1008 मधुसूदनानंद महाराज सर्वकल्याण, विश्व शांति के लिए यहां सेमलिया पहाड़ी पर स्थित मां अन्नपूर्णा धाम पर यज्ञ अनुष्ठान कर रहे हैं। चमत्कारी माता आदिशक्ति अन्नपुर्णा देवी का शक्ति पीठ सेमलिया धाम में चल रहे रुद्र चंडी महायज्ञ को अब तीसरा वर्ष शुरू हो रहा हैं। महामंडलेश्वर का संकल्प है की जब तक इसकी वैज्ञानिक सिद्धता और अनुसंधान खोज पूर्ण न हो जाए ये यज्ञ करता रहूंगा। साथ ही ईश्वर की शक्ति का अनुभव जनमानस को हो अन्नपूर्णा माता अन्न की देवी है इसके दर्शन से सब ऋण से मुक्ति मिलती है।
दो सालों से चल रहा अखण्ड भंडारा –
यहां पर बारह ज्योतिर्लिंग चार धाम नवग्रह मंदिर हनुमान मंदिर गुरुकुल गोशाला के निर्माण कार्य प्रगति पर है साथ ही यहाँ दो वर्षो से अखंड भंडारा भोजन प्रसादी भी चल रहा है, उल्लेखनीय है कि सेमलिया धाम अन्नपूर्णा पीठ आज देश में विख्यात हो गया है पुरे देश भर से हजारों श्रद्धालु यहां आकर माताजी के दर्शन कर महामण्डलेश्वर का आशीर्वाद लें चुके हैं। स्वामीजी इस स्थल को देश में सनातन धर्म का आदर्श स्थल शक्तिपीठ बनाना चाहते हैं। अन्नपूर्णा धाम के ट्रस्टी एडवोकेट संतोष मेड़तवाल, उमेश शर्मा भी उपस्थित थे।

