– बेदखली आदेश को 5 साल से रौंदता भू-माफिया, ड्रोन सर्वे में खेल, – पुजारी की भूमिका भी सवालों में
– कलेक्टर जन-सुनवाई में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
रतलाम। जिले में शासकीय भूमि की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पिपलौदा तहसील के ग्राम रियावन में स्थित शासकीय राम-लक्ष्मण मंदिर, उससे संबद्ध धर्मशाला और खसरा क्रमांक 1340, 1341, 1342 की बहुमूल्य शासकीय भूमि पर वर्षों से जारी अवैध कब्जा और निर्माण का सनसनीखेज मामला अब सीधे कलेक्टर के दरबार तक पहुंच गया है।
मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय जन-सुनवाई में ग्राम रियावन निवासी नवीनदास ने कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसे आवेदन पंजी क्रमांक 48655 के तहत पंजीबद्ध किया गया। शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि कलेक्टर के प्रत्यक्ष व्यवस्थापन वाली शासकीय मंदिर भूमि पर सीताराम पिता रामकिशन धाकड़ द्वारा लंबे समय से अवैध कब्जा कर रखा है और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नायब तहसीलदार पिपलौदा द्वारा 20 मार्च 2020 को पारित बेदखली आदेश (प्रकरण क्रमांक 0162/अ-68/2019-20) को करीब पांच साल बीत जाने के बाद भी लागू नहीं किया गया। सीमांकन आदेश भी फाइलों में दबे पड़े हैं, जबकि जमीन पर कब्जा और निर्माण धड़ल्ले से जारी है।
शासकीय अवकाश के दिनो में हो रहा अवैध निर्माण –
आवेदन में आरोप है कि शासकीय अवकाश के दिनों में भी मंदिर परिसर में अवैध निर्माण कराया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक संरक्षण की बू साफ झलकती है। इतना ही नहीं, मंदिर से जुड़ी शासकीय आबादी भूमि को ड्रोन सर्वे (स्वामित्व योजना) के तहत कथित रूप से राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर भू-माफिया के नाम दर्ज कराए जाने का गंभीर आरोप भी सामने आया है।
मंदिर पूजारी की भूमिका पर भी सवाल –
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब शासकीय मंदिर के पुजारी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए। आरोप है कि वर्षों से चल रहे अवैध कब्जे की जानकारी प्रशासन को विधिवत नहीं दी गई, जिससे उनकी भूमिका भी प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानी जा रही है।
अब गेंद कलेक्टर के पाले में –
शिकायतकर्ता नवीनदास ने प्रशासन से तत्काल अवैध कब्जा हटाने, निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने, ड्रोन सर्वे में हुए नामांतरण की निष्पक्ष जांच और शासकीय मंदिर भूमि की स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। बताया गया कि इससे पहले भी इस मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दिया जा चुका है। ग्रामीणों में भी भारी आक्रोश है। उनका साफ कहना है कि जब कलेक्टर के सीधे नियंत्रण वाली शासकीय मंदिर भूमि ही सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक की संपत्ति और आस्था की सुरक्षा की क्या गारंटी ? अब जन-सुनवाई में मामला दर्ज होने के बाद पूरे जिले की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह प्रकरण न सिर्फ शासकीय भूमि की सुरक्षा, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की भी बड़ी परीक्षा बन चुका है।
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