– धामनोद में 5 हजार लीटर अवैध बायोडीजल जब्त, सुखेड़ा पंचायत के सरपंच-सचिव सुनवाई से रहे नदारद
– जावरा के सोहेल को पांच जिलों की सीमा से एक वर्ष के लिए किया निष्कासित
रतलाम। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजय कटेसरिया द्वारा विभिन्न प्रकरणों में कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के तहत अवैध बायोडीजल भंडारण के मामले में लाखों रुपये का माल राजसात किया गया, न्यायालयीन सुनवाई से अनुपस्थित रहने पर सरपंच-सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया, वहीं एक व्यक्ति को एक वर्ष के लिए जिला बदर किया गया है।
अवैध बायोडीजल भंडारण पर 3.70 लाख का माल राजसात –
कलेक्टर ने अम्बिका बायोफ्यूल, रतलाम-बांसवाड़ा रोड, धामनोद के संचालक रितेश पिता कमलाशंकर पाटीदार, निवासी कमलाखेड़ा, तहसील पिपलोदा के विरुद्ध कार्रवाई की। प्रकरण में बिना अनुमति बायोडीजल का क्रय-विक्रय एवं भंडारण करना पाया गया। जांच में मोटर स्पिरिट एवं हाईस्पीड डीजल (आपूर्ति, वितरण का विनियमन और कदाचारों की रोकथाम) आदेश, 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। इसके बाद कलेक्टर ने मौके पर अवैध रूप से भंडारित 5 हजार लीटर बायोडीजल, जिसकी अनुमानित कीमत 3 लाख 70 हजार रुपये है, शासन पक्ष में राजसात करने के आदेश जारी किए।
सुनवाई में नहीं पहुंचे सरपंच-सचिव, जमानती वारंट जारी –
एक अन्य न्यायालयीन प्रकरण में शिकायतकर्ता के आवेदन पर ग्राम पंचायत सुखेड़ा के सरपंच महावीर पिता पारसमल मेहता और सचिव दिनेशचन्द्र पिता विश्वनाथ तिवारी को सुनवाई में उपस्थित होकर दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए पत्र जारी किया गया था। पत्र प्राप्त होने के बावजूद दोनों बिना कोई कारण बताए सुनवाई में अनुपस्थित रहे। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर न्यायालय द्वारा दोनों के विरुद्ध जमानती वारंट जारी किया गया है।
जावरा के सोहेल को एक वर्ष का जिला बदर –
कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत भी कार्रवाई की गई। इसके अंतर्गत सोहेल पिता अजीज शाह, निवासी रविदास मोहल्ला, जावरा, थाना जावरा शहर को अपराधों में संलिप्तता पाए जाने पर एक वर्ष के लिए जिला बदर किया गया है। आदेश के तहत सोहेल को रतलाम जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा के साथ-साथ उज्जैन, आगर, धार, झाबुआ एवं मंदसौर जिलों की राजस्व सीमाओं से भी निष्कासित किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी द्वारा की गई इन कार्रवाइयों से प्रशासन ने नियमों के पालन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और न्यायालयीन प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है।
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