– लोकायुक्त उज्जैन में दर्ज हैं तीनों प्रकरण, सीमांकन रिपोर्ट से लेकर भूमि डायवर्जन तक रिश्वत मांगने के आरोप; अभियोजन स्वीकृति के बाद निलंबन
रतलाम। रिश्वत मांगने के तीन अलग-अलग मामलों में कलेक्टर अजय कटेसरिया ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीन पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। लोकायुक्त उज्जैन में दर्ज इन प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति जारी होने के बाद यह कार्रवाई की गई है। आरोप सीमांकन रिपोर्ट, पंचनामा और भूमि डायवर्जन की प्रक्रिया के एवज में रिश्वत मांगने से जुड़े हैं। निलंबीत पटवारियों में रमेश बैरागी, प्रभुकुमार गरवाल और प्रवीण कुमार जैन शामिल हैं। तीनों के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा ट्रैप की कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए गए थे। अभियोजन स्वीकृति जारी होने के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
भूमि डायवर्जन के लिए 6 हजार रुपये मांगने का आरोप –
तहसील जावरा के ग्राम खेड़ाखेड़ी में पदस्थ पटवारी प्रवीण कुमार जैन के विरुद्ध श्यामु बाई बलाई ने लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार, ग्राम बामनखेड़ी स्थित भूमि के डायवर्जन संबंधी कार्रवाई के लिए संपर्क करने पर 6 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। इस मामले में भी लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप की कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किया था।
सीमांकन रिपोर्ट के लिए 50 हजार मांगने का आरोप –
ग्राम पंचेड़, टप्पा नामली, तहसील रतलाम ग्रामीण में पदस्थ पटवारी रमेश बैरागी के विरुद्ध गोपाल उपाध्याय ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, भूमि सीमांकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने और संबंधित शासकीय कार्य के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि 40 हजार रुपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किए गए। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस उज्जैन ने ट्रैप की कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किया था।
सीमांकन रिपोर्ट और पंचनामा देने के लिए 4 हजार मांगने का आरोप –
तहसील ताल के ग्राम किटखेड़ी में पदस्थ पटवारी प्रभुकुमार गरवाल के विरुद्ध किशनलाल आंजना ने शिकायत की थी। आरोप है कि उनके पिता की भूमि के सीमांकन की रिपोर्ट और पंचनामा उपलब्ध कराने के एवज में 4 हजार रुपये की मांग की गई। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस उज्जैन ने 14 मई 2025 को ट्रैप की कार्रवाई कर अपराध पंजीबद्ध किया था।
निष्पक्ष जांच के लिए निलंबन –
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने तीनों मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी करने के बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के उपनियम (1) के तहत निलंबन की कार्रवाई की है। निलंबन अवधि के दौरान संबंधित पटवारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि तीनों पटवारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निलंबन की कार्रवाई की है।
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