– रिछाचांदा में किसानों का फूटा गुस्सा, बोले—राजस्व अमला खाली हाथ लौटा, अब कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
जावरा। जावरा तहसील के ग्राम रिछाचांदा में खेत तक जाने के रास्ते का विवाद अब प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 20 दिनों से रास्ता बंद होने के कारण किसान खरीफ फसल की बुआई तक नहीं कर सके हैं। किसानों का आरोप है कि तहसीलदार के दो आदेश के बावजूद आज तक रास्ता नहीं खुल पाया। मामला अब जिला कलेक्टर तक पहुंच गया है।
ग्राम झालवा निवासी मोहनलाल पिता मोडीराम, बंसीलाल पिता मोडीराम एवं राजू पिता जगन्नाथ ने तहसीलदार जावरा को दिए आवेदन में बताया कि ग्राम रिछाचांदा स्थित उनकी कृषि भूमि के सर्वे क्रमांक 288 एवं 278 तक जाने वाले रास्ते को शांतिलाल पिता शंकरलाल, गोपाल पिता शंकरलाल, मदनलाल पिता शंकरलाल एवं सालगराम पिता शंकरलाल निवासी ग्राम रिछाचांदा द्वारा कथित रूप से बंद कर दिया गया है। इससे किसानों का खेतों तक पहुंचना पूरी तरह बाधित हो गया है।
आवेदन के अनुसार प्रार्थी किसानों ने 16 जून 2026 को तहसीलदार जावरा के समक्ष रास्ता खुलवाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के बाद तहसीलदार ने उसी दिन पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक को मौके पर पहुंचकर रास्ता खुलवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन किसानों का आरोप है कि आदेश का आज तक पालन नहीं हुआ। वहीं तहसीलदार जावरा द्वारा 29 जून को भी रास्ता खुलवाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन आदेश के चार दिन बीतने के बाद भी अब तक रास्ता नहीं खुल सका हैं।
पथराव की कोशिश और गली गलोच की तो पंचनामा बनाकर लोटा दल –
किसानों का कहना है कि तहसीलदार के आदेश के पालन के लिए जब राजस्व विभाग का दल मौके पर पहुंचा तो प्रतिपक्ष ने कथित रूप से दल पर पथराव करने के लिए हाथो में पत्थर उठा लिए और दल के साथ गली गलोच करते हुवे विवाद करने लगे । इसके बाद अधिकारियों ने मौके का पंचनामा तैयार किया और बिना रास्ता खुलवाए लौट गए। किसानों का आरोप है कि इसके बाद भी प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
नहीं मिला रास्ता, अब तक नहीं हुई बुआई –
पीडि़त किसानों का कहना है कि खेत तक रास्ता बंद होने से वे अब तक खरीफ फसल की बुआई भी नहीं कर पाए हैं। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और बुआई का सबसे महत्वपूर्ण समय निकलता जा रहा है। खेतों तक ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और बीज नहीं पहुंच पाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
मिल रहा केवल आश्वासन –
किसानों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक से तहसीलदार के आदेश का पालन कराने का आग्रह किया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। दूसरी ओर रास्ता बंद रहने से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और कभी भी विवाद गंभीर रूप ले सकता है। अब प्रार्थी किसानों ने जिला कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि राजस्व एवं पुलिस अमले की मौजूदगी में रास्ता खुलवाया जाए, ताकि वे अपने खेतों में बुआई कर सकें और किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तहसीलदार का आदेश जारी हो चुका है, तब भी यदि उसका पालन नहीं हो पा रहा है तो किसानों को न्याय कब मिलेगा और आखिर प्रशासन अपने ही आदेश को जमीन पर कब उतारेगा ?


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