– सोमवार को मंदसौर पहुंचकर सांसद सुधीर गुप्ता को सौंपेंगे ज्ञापन
– 1998 से 2011 तक नियुक्त शिक्षकों को दोबारा पात्रता सिद्ध करने की अनिवार्यता के विरोध में गणेश मालवीय के नेतृत्व में निकली शिक्षक सम्मान पैदल यात्रा।
जावरा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के बाद वर्ष 1998 से 2011 तक नियुक्त हजारों शिक्षकों को अपनी पात्रता पुन: सिद्ध करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसी व्यवस्था के विरोध और शिक्षक हितों की मांगों को लेकर पिपलोदा के शिक्षक गणेश मालवीय के नेतृत्व में निकाली जा रही शिक्षक सम्मान पैदल यात्रा रविवार को जावरा पहुंची, जहां बड़ी संख्या में शिक्षकों ने यात्रा का स्वागत कर अपना समर्थन व्यक्त किया। यात्रा के दौरान मालवीय इस भीषण गर्मी में नंगे पैर चलकर मंदसौर जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार यह पैदल यात्रा पिपलोदा से प्रारंभ होकर जावरा, ढोढर, दलौदा होते हुए मंदसौर तक पहुंच रही है। यात्रा का उद्देश्य देशभर के सांसदों तक शिक्षकों की आवाज पहुंचाना तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा को निरस्त करने की मांग को लोकतांत्रिक तरीके से जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखना है। यात्रा के दौरान शिक्षकों ने कहा कि वर्ष 1998 से लेकर 2011 तक नियुक्त शिक्षकों ने वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं देते हुए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। ऐसे में लंबे समय बाद उन्हें पुन: पात्रता सिद्ध करने के लिए परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना है कि सेवा में रहते हुए वर्षों का अनुभव और कार्य ही उनकी योग्यता का प्रमाण है। जावरा में स्वागत कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकों ने एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि देश के लाखों शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ी हुई है। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने यात्रा में शामिल साथियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया और आंदोलन को समर्थन देने का संकल्प लिया।
लोकतांत्रित व्यवस्था में संसद ही मंच –
यात्रा के संयोजक गणेश मालवीय ने बताया कि भारत के विभिन्न राज्यों के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों से शिक्षक पात्रता परीक्षा को निरस्त करने तथा शिक्षकों के हित में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद ही वह मंच है जहां जनभावनाओं और समस्याओं का समाधान संभव है, इसलिए शिक्षकों की आवाज सांसदों तक पहुंचाना आवश्यक है। यह पैदल यात्रा सोमवार शाम मंदसौर पहुंचेगी, जहां सांसद सुधीर गुप्ता को शिक्षकों की मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में शिक्षक पात्रता परीक्षा को निरस्त करने सहित शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को प्रमुखता से रखा जाएगा।
नारों के साथ किया मालवीय का स्वागत –
यात्रा के दौरान शिक्षक एकता जिंदाबाद, एक शिक्षक-एक आवाज-एक संकल्प और शिक्षक हित, राष्ट्र हित जैसे नारों के साथ शिक्षकों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। शिक्षकों का मानना है कि यह अभियान शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

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