– 3.83 लाख का चेक हुआ था बाउंस, न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए प्रतिकर, खर्च और कारावास की सुनाई सजा
जावरा के एक चर्चित व्यापारी को चेक बाउंस प्रकरण में न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जावरा ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए 6 माह के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रतिकर, अधिवक्ता शुल्क एवं अन्य खर्चों सहित कुल 6.09 लाख से अधिक की राशि अदा करने का आदेश भी दिया गया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जावरा, जिला रतलाम के न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण में न्यायिक मजिस्ट्रेट दिलीप पाटिल ने 26 मई 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए जावरा के व्यापारी गोर्धन बादलानी को चेक बाउंस प्रकरण में दोषी ठहराया है।
प्रकरण के अनुसार, श्री संयुक्त जैन साख सहकारिता मर्यादित, जावरा के अध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार डांगी की ओर से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया था। आरोप था कि आरोपी ने संस्था से निर्धारित शर्तों पर ऋण प्राप्त किया था तथा भुगतान के लिए रुपए 3,83,700 का चेक जारी किया था। जब उक्त चेक बैंक में प्रस्तुत किया गया तो वह अपर्याप्त निधि (Insufficient Funds) के कारण अनादृत (बाउंस) हो गया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों एवं दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण किया। इसके बाद आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत दोषी पाया गया।
न्यायालय ने सुनाई 6 माह की सजा –
न्यायालय ने आरोपी को 6 माह के कारावास से दंडित करते हुए चेक राशि एवं प्रतिकर के रूप में रुपए 5,88,000 तथा स्टाम्प शुल्क, अधिवक्ता शुल्क एवं अन्य न्यायालयीन व्यय सहित कुल 6,09,470 की राशि अदा करने का आदेश दिया है। यह आदेश दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 359 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 400 के प्रावधानों के तहत पारित किया गया। प्रकरण में परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्रेणिक सकलेचा ने पैरवी की।

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