– 13 साल से न्याय की लड़ाई, तीन बार जीत के बाद भी कार्रवाई शून्य
– कलेक्टर से मिले थे रहवासी, मंगलवार को तहसीलदार पहुंचे मौके पर
– राजस्व निरीक्षक व पटवारियो के साथ की नप्ती, रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
जावरा। नजूल की शासकीय भूमि पर हुए अवैध निर्माण और वर्षों से बाधित सार्वजनिक रास्ते के निराकरण को लेकर विवेकानंद कॉलोनी रहवासी संघ ने एक बार फिर प्रशासन के रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। रहवासी संघ के प्रतिनिधि हाल ही में रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह के जावरा आगमन पर एसडीएम कार्यालय पर मिले थे, जहाँ उन्होंने तत्काल कार्रवाई की माँग रखी थी। जिस पर कलेक्टर ने 7 दिनों में एसडीएम से रिपोर्ट तलब की गई थी। इसी क्रम में मंगलवार को तहसीलदार पारस वैश 2 राजस्व निरीक्षकों और 5 पटवारियों के दल के साथ मौके पर पहुँचे और मौका मुआयना कर रहवासियों से चर्चा की, चर्चा उपरात रहवासियों द्वारा दिए गए नक्शे के अनुसार नप्ती करवाई, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार से चर्चा के दौरान रहवासियों का आरोप है कि कॉलोनाइजऱ की स्पष्ट गलती पर पर्दा डाला जा रहा है और उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि कोर्ट द्वारा 5 अवैध मकानों को तोडऩे के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं, इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
13 साल पुराना केस, तीन बार जीत, फिर भी न्याय अधूरा –
विवेकानंद कॉलोनी रहवासी संघ ने बताया कि यह मामला 13 वर्षों से न्यायालय में लंबित रहा है और तीन बार फैसला उनके पक्ष में आया है। इतना ही नहीं, पूर्व एसडीएम के न्यायालय में दिए गए बयान में भी यह स्पष्ट है कि रेलवे दीवार से 52 फीट तक की भूमि नजूल (शासकीय) है। फिर सवाल उठता है कि यदि ज़मीन शासकीय थी, तो उसकी बिक्री कैसे हुई ? नजूल की जमीन को किन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत से बेचा गया। किसकी अनुमति से इस जमीन पर निर्माण कार्य हो गए ? अदालत के आदेश, प्रशासनिक रिकॉर्ड और मौके की नपती—सब कुछ स्पष्ट होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक निष्क्रियता और संरक्षण के आरोपों को और मज़बूत करता है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
आंदोलन की चेतावनी –
विवेकानंद कॉलोनी रहवासी संघ ने साफ कहा है कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पुन: कलेक्टर से मिलेंगे, और इसके बाद धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। संघ ने भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और अवैध निर्माण तत्काल हटाने की माँग दोहराई है। तहसीलदार से चर्चा के दौरान संघ के शेखर जोशी, अशोक गोयल, संजू राठौर, सतीष उपाध्याय, संजय देवड़ा, सोम सराड़ा, गोपाल उपाध्याय, राजकुमार गुरनानी सहित रहवासी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट मिलने पर होगी कार्रवाई –
मामले में तहसीलदार पारस वेश ने बताया कि मौके की जांच और नप्ती के लिए दल का गठन किया था। जिसमें 2 राजस्व निरीक्षक और 5 पटवारी शामिल हैं। मंगलवार को मौका मुआयना भी किया हैं। गठित दल की रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन एसडीएम को भेजा जाएगा।
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