– इंजिनियर के अभाव में भरे हुए पिल्लर फिर से पड़ रहे तोडऩा, माल की क्वालिटी पर भी उठ रहे सवाल
– शहर के पॉलिटेक्निक कॉलेज में चल रहा अतिरिक्त कक्ष और लेब का निर्माण
– कॉलेज प्राचार्य ने भी इंजिनियर द्वारा विजीट नहीं किए जाने की शिकायत की थी
– लोक निर्माण विभाग की पीआईयू कर रही निर्माण
जावरा। दीया तले अंधेरा वाली कहावत जावरा के गोविंदराम तोंदी पोलिटेक्निक कॉलेज में चरितार्थ हो रही हैं, मध्यप्रदेश के कई नामचीन सिविल इंजिनियर को डिप्लोमा देने वाले इस कॉलेज में ही बगैर इंजिनियर की देखरेख के करीब ढाई करोड़ रुपए का निर्माण कार्य चालु हैं, यहां ना तो लोक निर्माण विभाग (पीआईयू) के इंजिनियिर साईट पर मौजुद रहते हैं और ना ही निर्माण करने वाली कंपनी ने ही अपना इंजिनियर रखा हुआ हैं। ऐसे में शासन के ढाई करोड़ रुपए को मजदुर मिस्त्री मिलकर निपटा रहे हैं। इंजिनियिर के अनुपस्थिति में मजदुर गलत कॉलम भर रहे हैं, जिसे पुन: तोडऩा पड़ रहा हैं, इतना ही नहीं साईट पर ठेकेदार द्वारा ना तो प्रोजेक्ट की ड्राईंग लगाई और ना ही डिजाईन लगाई हैं। ऐसे में यहां मनमर्जी से ही निर्माण कार्य कर शासन को चुना लगाया जा रहा हैं।

लोक निर्माण विभाग की पीआईयू द्वारा जावरा के शहर के पोलिटेक्निक कॉलेज में 2 करोड़ 47 लाख 73 हजार रुपए की लागत से अतिरिक्त कक्ष और लेब का निर्माण कार्य किया जा रहा हैं। करीब ढाई करोड़ रुपए के बडे प्रोजेक्ट को जिसे मजदुरों और मिस्त्रियों के भरोसे ही छोड़ रखा हैं, साईट पर ना तो किसी प्रकार की कोई डिजाईन लगाई हुई हैं और ना ही ड्राईग, ऐसे में इंजिनियर के अभाव में मजदुर और मिस्त्री गलत कॉलम भर रहे हैं, नतीजतन भरे हुए कॉलम को पुन: तोड़ा जा रहा हैं। वहीं कॉलम भरने में जो सामग्री उपयोग की जा रही हैं, उसकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य में किसी भी इंजिनियर की देख रेख नहीं किए जाने की शिकायत महाविद्यालय प्राचार्य द्वारा पीआईयू को की गई थी, लेकिन उसके बाद भी कोई इंजिनियर साईट पर मौजुद नहीं रहता हैं। ऐसे में शासन के ढाई करोड़ रुपए का मजदुर और मिस्त्री मिलकर चुना लगा रहे हैं। लेकिन इस अंधेरगर्दी की और कोई ध्यान नहीं दे रहा हैं।


