– जावरा में भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल, चौपाटी चौराहे पर भगवा ग्रुप का धरना
– भ्रष्टाचार, अवैध कॉलोनियों और अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल
जावरा। राजस्व विभाग में कथित भ्रष्टाचार, अवैध कॉलोनियों को संरक्षण, गोचर भूमि पर अतिक्रमण और आम नागरिकों के राजस्व संबंधी कार्यों में हो रही देरी के विरोध में गुरुवार को भगवा ग्रुप ने चौपाटी चौराहे पर धरना प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग में बिना लेन-देन के नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे कार्य नहीं हो रहे हैं तथा जनता को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
धरने के दौरान मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन की प्रतिलिपि पढ़कर सुनाई गई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि 11 जून 2026 को एसडीएम कार्यालय में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर पूरे मामले की शिकायत की गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह संदेश जा रहा है कि भ्रष्टाचार करने वालों को प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है।
11 जून को उठाए थे भ्रष्टाचार के मुद्दे, अब धरने से बढ़ाया दबाव –
भगवा ग्रुप ने बताया कि 11 जून को दिए गए ज्ञापन में राजस्व विभाग में कथित भ्रष्टाचार, नामांतरण एवं सीमांकन में रिश्वतखोरी, अवैध कॉलोनियों के निर्माण, गोचर भूमि पर अतिक्रमण, नक्शों में छेड़छाड़ और प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे। संगठन का आरोप है कि शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते धरना देने का निर्णय लिया गया।
तत्कालीन एसडीएम के कार्यकाल की जांच की मांग –
धरने के दौरान संगठन ने तत्कालीन एसडीएम सुनील जयसवाल के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। आरोप लगाया गया कि उनके कार्यकाल में कई मामलों में नियमों की अनदेखी हुई तथा शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। संगठन ने कहा कि जिन अधिकारियों का तबादला हो चुका है, उन्हें तत्काल कार्यमुक्त किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।
कॉलोनी का मामला फिर उठा –
भगवा ग्रुप ने चौपाटी स्थित कॉलोनी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संगठन का आरोप है कि कॉलोनी का विकास नियमों के विपरीत किया गया । पूर्व में नगर पालिका द्वारा नामांतरण निरस्त किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कथित रूप से नियमों के विरुद्ध कार्रवाई की। साथ ही आरोप लगाया गया कि तत्कालीन एसडीएम आर.आई. केसरसिंह व दिनेश टोकरे ने नियम के उल्लंघन कार्य किया और पूर्व की नप्ती को रद्द कर वर्तमान में हो रही नप्ती को भी बिना किसी कारण के रुकवा दिया है।
गोचर भूमि और अवैध कॉलोनियों पर भी लगाए गंभीर आरोप –
धरने में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जावरा और पिपलौदा क्षेत्र में राजस्व विभाग, रजिस्ट्रार कार्यालय एवं नगर पालिका की कथित मिलीभगत से कई अवैध कॉलोनियां विकसित हुई हैं। गोचर भूमि पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। इससे शासन को राजस्व की हानि होने के साथ-साथ आम लोगों के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं।
नक्शों में छेड़छाड़ और सीमांकन प्रभावित करने का आरोप –
भगवा ग्रुप ने आरोप लगाया कि कई पटवारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति से नक्शों में छेड़छाड़ कर जमीनों के सीमांकन को प्रभावित किया है। नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के मामलों में तय समय सीमा का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे किसान और आम नागरिक परेशान हैं।
हरियाखेड़ा रोड पर निजी भूमि पर सड़क बनाने का आरोप –
संगठन ने पिपलौदा चौराहे से हरियाखेड़ा रोड तक के क्षेत्र का मामला भी उठाया। आरोप लगाया गया कि कुछ प्रभावशाली लोगों और कॉलोनाइजरों को लाभ पहुंचाने के लिए निजी भूमि पर सड़क और नाली निर्माण का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकारी भूमि पर हुए स्थायी अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग –
धरने के दौरान भगवा ग्रुप के कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी प्रतिमा एवं मां अंबे के चरणों में बैठकर मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। संगठन ने कहा कि राजस्व विभाग, नगर पालिका, रजिस्ट्रार कार्यालय तथा संबंधित अधिकारियों और कॉलोनाइजरों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
नहीं हुई कार्रवाई तो होगा चरणबद्ध आंदोलन –
धरने के समापन पर भगवा ग्रुप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो संगठन पूरे क्षेत्र में चरणबद्ध जन आंदोलन शुरू करेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
मुख्य मांगें –
– राजस्व विभाग में कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच।
– तत्कालीन एसडीएम सुनील जायसवाल के कार्यकाल की जांच।
– अवैध कॉलोनियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई।
– गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाया जाए।
– नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के मामलों का समय-सीमा में निराकरण।
– तबादला हो चुके अधिकारियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए।

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