– बिना रास्ते के सड़क निर्माण : 95 प्रतिशत छात्र गायब, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
– क्या बगैर अनुमति के कैसे खोदी ठेकेदार ने सड़क ? या बिना समस्या जाने ही कॉलेज ने दे दी अनुमति
– अब बड़ा सवाल … जिम्मेदार कोन ? प्राचार्य, सिविल डिपार्टमेेंट हेड या ठेकेदार
जावरा। जिले का एकमात्र पॉलिटेक्निक कॉलेज, जहां से वर्षों में कई काबिल इंजीनियर निकले—आज खुद बुनियादी व्यवस्था की विफलता का उदाहरण बनता जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज में तब्दील होने का सपना भले अधूरा रह गया हो, लेकिन मौजूदा हालात इस संस्थान की साख पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
कॉलेज परिसर में इन दिनों नए भवन और सीसी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। नया भवन बनकर तैयार है, लेकिन अब भी लोकार्पण का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर, पहाडिय़ा रोड से नीमन रोड पर स्थित मुख्य द्वार से कॉलेज भवन तक पहुंचने के लिए बनाई जा रही सीसी सड़क ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। लेकिन इन दिनों इस सड़क का निर्माण कार्य भी बंद पड़ा हैं, ठेकेदार द्वारा लगातार काम नहीं किए जाने से परेशानी और अधिक बढ़ रही हैं।
पहले सड़क खोदी, रास्ता देना भूल गए ! –
निर्माण एजेंसी ने बिना किसी वैकल्पिक एप्रोच रोड के मुख्य मार्ग को खोद डाला। न तो विधिवत अनुमति के संकेत हैं और न ही छात्रों व स्टाफ के आवागमन की कोई व्यवस्था। नतीजा—कॉलेज तक पहुंचने का रास्ता लगभग खत्म। इतना ही नहीं कॉलेज में बने स्टॉफ क्वार्टस में रहने वाले कर्मचारियों के लिए तो परेशानी और भी अधिक हो गई हैं, सड़क के अभाव में वे ना तो कॉलेज से जरुरत के सामान लेने जा पा रहे हैं और ना ही जरुरत की वस्तु उनके दरवाजे तक आ पा रही हैं।
95 प्रतिशत तक गिरी उपस्थिति, शिक्षा ठप जैसी स्थिति –
इस अव्यवस्था का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ा है। कॉलेज में उपस्थिति महज 5 प्रतिशत तक सिमट गई है। प्राध्यापक और कर्मचारी भी भारी परेशानियों के बीच किसी तरह कॉलेज पहुंच रहे हैं।
पीछे का रास्ता भी खत्म, मंदिर से पैदल चढ़ाई मजबूरी –
कॉलेज के पीछे की ओर एक कच्चा रास्ता था, लेकिन निर्माण सामग्री ढोने वाले डंपरों ने उसे भी पूरी तरह खराब कर दिया। अब हालात ये हैं कि कई लोग नीचे स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर के पास वाहन खड़ा कर पहाड़ी चढ़कर पैदल कॉलेज पहुंचने को मजबूर हैं।
जिम्मेदार कौन ? प्राचार्य, सिविल विभाग या ठेकेदार ? –
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कॉलेज प्रबंधन ने बिना एप्रोच रोड के निर्माण की अनुमति दी ? या ठेकेदार ने नियमों को दरकिनार कर मनमानी की ? हैरानी की बात यह है कि जिस कॉलेज से सिविल इंजीनियर निकलते हैं, वहीं ऐसी गंभीर चूक कैसे हो गई ?

नियमों की खुली अनदेखी, कार्रवाई कब ? –
बिना वैकल्पिक मार्ग के सड़क खोदना सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे जिम्मेदारों की भूमिका पर और संदेह गहरा गया है।
समाधान क्या ? तुरंत चाहिए रास्ता –
अब जरूरी है कि ठेकेदार तत्काल पीछे की कच्ची सड़क को जेसीबी और रोड रोलर से दुरुस्त करे ताकि विद्यार्थी और कर्मचारी अपने दुपहिया और चार पहिया वाहनों से कॉलेज भवन तक पहुंच सके या मुख्य मार्ग के समानांतर एक नया एप्रोच रोड तैयार करे ताकि छात्र, शिक्षक और कर्मचारी इस परेशानी से राहत पा सकें। सवाल सीधा हैं जो कॉलेज इंजीनियर बनाता है, क्या वह खुद अपनी सड़क भी सही से नहीं बना सकता ?


