– हर बोरी पर 10 रुपए की कथित वसूली का आरोप, सोयाबीन से भरी गाड़ी रोकने की दी जाती थी धमकी
– लोकायुक्त उज्जैन की 10 सदस्यीय टीम ने माकड़ोन मंडी में की कार्रवाई
उज्जैन/माकड़ोन। मंडियों में किसानों और व्यापारियों के हितों की रक्षा तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के दावों के बीच माकड़ोन अनाज मंडी से रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कार्रवाई करते हुए मंडी उप निरीक्षक रोशन आर्य और उसके साथी आउटसोर्स कर्मचारी संतोष भाटी को 4,000 रुपए की कथित रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद मंडी परिसर में हड़कंप मच गया।
हर बोरी पर 10 रुपए की मांग, पैसे नहीं देने पर गाड़ी रोकने का आरोप –
लोकायुक्त के अनुसार, शिकायतकर्ता योगेश राठौर निवासी ग्राम रूपाखेड़ी, जिला उज्जैन, माकड़ोन मंडी में सोयाबीन खरीदने का कारोबार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी उप निरीक्षक रोशन आर्य उनसे प्रत्येक बोरी के हिसाब से 10 रुपए की रिश्वत मांगता था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि पैसे नहीं देने पर सोयाबीन से भरी गाड़ी को मंडी से बाहर नहीं जाने देने की धमकी दी जाती थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि मंडी का निर्धारित टैक्स चुकाने के बावजूद उनसे कथित तौर पर अतिरिक्त रकम मांगी जा रही थी। इसी से परेशान होकर उन्होंने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की।
शिकायत का सत्यापन, फिर बिछाया गया ट्रैप –
प्राप्त शिकायत के आधार पर लोकायुक्त उज्जैन के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार दीक्षित के निर्देश पर शिकायत का सत्यापन उप पुलिस अधीक्षक राजेश पाठक ने किया। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद 16 अक्टूबर को ट्रैप की योजना बनाई गई। लोकायुक्त की 10 सदस्यीय टीम माकड़ोन मंडी पहुंची। शिकायतकर्ता योगेश राठौर ने जैसे ही 4,000 रुपए की राशि दी, आरोप के अनुसार उप निरीक्षक रोशन आर्य ने वह रकम अपने साथी आउटसोर्स कर्मचारी संतोष भाटी को पकड़ा दी। इसके तुरंत बाद लोकायुक्त टीम ने दोनों को मंडी परिसर में पकड़ लिया और रिश्वत की राशि बरामद कर ली।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई –
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देशन, उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह तथा पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार दीक्षित के मार्गदर्शन में की गई। ट्रैप दल में डीएसपी राजेश पाठक, डीएसपी दीपक सेजवार, प्रधान आरक्षक हितेश ललावत, आरक्षक शिवकुमार शर्मा, श्याम शर्मा, इसरार खान, उमेश जाटव सहित अन्य सदस्य एवं साक्षी शामिल रहे। सवाल यह है कि मंडी में कारोबार करने वाले व्यापारियों को यदि निर्धारित शुल्क के अलावा कथित रिश्वत की मांग का सामना करना पड़े, तो वे अपना कारोबार कैसे करेंगे ? लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। मामले में आगे की जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
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