– जर्जर भवन, अधूरा पुस्तक वितरण और साइकिलें भी बाकी; औचक निरीक्षण में खुली सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल
– रिंगनोद के पीएम श्री स्कूल की बदहाल व्यवस्था पर कलेक्टर नाराज, डीईओ को जांच और कार्रवाई के निर्देश
रिंगनोद/जावरा। सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा, मुफ्त पाठ्य पुस्तकें और शासन की योजनाओं का लाभ समय पर देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। रिंगनोद के पीएम श्री एकीकृत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में औचक निरीक्षण के दौरान ऐसी ही तस्वीर सामने आई, जहां विद्यार्थियों को शत-प्रतिशत पुस्तकों का वितरण नहीं हुआ था। स्कूल की व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं पाई गईं और कुछ साइकिलों का वितरण भी बाकी मिला। हालात देखकर कलेक्टर अजय कटेसरिया ने नाराजगी जताई और जिला शिक्षा अधिकारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी किताबें ही समय पर नहीं मिलीं, आखिर जिम्मेदार कौन ? –
16 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत ग्राम रिंगनोद में आयोजित जन विश्वास शिविर के बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया एवं जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने पीएम श्री विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण में पुस्तक वितरण की स्थिति ने अधिकारियों का ध्यान खींचा। विद्यालय में अब तक सभी विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब शासन विद्यार्थियों के लिए पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराता है, तो फिर वितरण में देरी क्यों हुई? क्या इसकी नियमित निगरानी नहीं की गई, या जिम्मेदारों ने इस काम को गंभीरता से नहीं लिया ? कलेक्टर ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को पुस्तक वितरण की जांच करने और संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
जर्जर भवन में पढ़ाई, नवीन भवन के प्रस्ताव के निर्देश –
निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। भवन की जर्जर हालत को देखते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को नवीन भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यक बजट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सके। यह स्थिति सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर भी सवाल खड़े करती है। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए भवन, सुविधाओं और नियमित रखरखाव पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है।
साइकिल वितरण भी अधूरा, योजनाओं का लाभ पहुंचाने में देरी क्यों ? –
निरीक्षण में कुछ साइकिलों का वितरण भी शेष पाया गया। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को शेष साइकिलें जल्द वितरित करने के निर्देश दिए। पुस्तकें और साइकिलें विद्यार्थियों की पढ़ाई एवं सुविधा से जुड़ी हैं। ऐसे में इनका वितरण लंबित रहना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
सिर्फ निर्देशों से नहीं चलेगा काम, अब कार्रवाई का इंतजार –
कलेक्टर ने पुस्तकालय में पुस्तकों को व्यवस्थित ढंग से संधारित रखने तथा विद्यार्थियों को शासन की सुविधाओं का समय पर लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि विद्यालय में पुस्तक वितरण पूरा क्यों नहीं हुआ ? साइकिलें अब तक क्यों नहीं बंटी ? भवन की खराब स्थिति पर पहले क्या कदम उठाए गए? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। अब देखना यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी की जांच में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और निर्देशों के बाद व्यवस्था में वास्तविक सुधार होता है या मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है। सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को सुविधाएं समय पर मिलना किसी की मेहरबानी नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी है।
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