– नगर पालिका सभागृह में एमपीआरडीसी, एसडीएम और प्रभावितों के बीच लंबी चर्चा
– किसी ने एलाइनमेंट बदलने की मांग उठाई तो किसी ने वर्तमान मार्ग के समर्थन में सौंपा ज्ञापन
जावरा। जावरा-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना को लेकर मंगलवार को नगर पालिका सभागृह में आयोजित धारा-4 की सामाजिक समाघात (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) बैठक बहस और विरोध का केंद्र बन गई। फोरलेन के प्रस्तावित एलाइनमेंट को लेकर शहर दो हिस्सों में बंटा नजर आया। एक ओर जन संघर्ष समिति ने वर्तमान एलाइनमेंट को पूरी तरह जनविरोधी बताते हुए बैठक की वैधता पर सवाल खड़े किए और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग कर दी, वहीं दूसरी ओर प्रभावित भू-स्वामियों और नागरिकों के एक अन्य समूह ने इसी मार्ग को सबसे व्यावहारिक और जनहितकारी बताते हुए प्रशासन के समक्ष समर्थन पत्र सौंप दिया। दोनों पक्षों की दलीलों के बीच एमपीआरडीसी और प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी आपत्तियां और सुझाव दर्ज किए।
जन संघर्ष समिति ने बैठक को बताया अनुचित –
बैठक के दौरान जन संघर्ष समिति ने एमपीआरडीसी के एजीएम नितीन करोड़े, सुनील जैन, धर्मेन्द्र जोशी के साथ जावरा एसडीएम रचना शर्मा तथा तहसीलदार सहदेव मौरे व अन्य अधिकारियों के समक्ष कहा कि हुसैन टेकरी से जोयो तिराहा तक जिस एलाइनमेंट पर धारा-4 की प्रक्रिया चलाई जा रही है, उसे पूर्व में राजस्व विभाग के आदेश से निरस्त किया जा चुका है। समिति का दावा है कि सांसद, विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष और सामाजिक संगठनों की मांग पर यह एलाइनमेंट समाप्त किया गया था तथा हाल ही में इस क्षेत्र की रजिस्ट्रियों पर लगा प्रतिबंध भी हटा लिया गया है। ऐसे में उसी मार्ग पर दोबारा जनसुनवाई आयोजित करना जनभावनाओं और प्रशासनिक निर्णयों के विपरीत है। समिति ने आरोप लगाया कि ग्रीनफील्ड परियोजना के नाम पर शहर के बीचों-बीच बसे क्षेत्र को प्रभावित किया जा रहा है, जबकि भुतेड़ा इंटरचेंज से उज्जैन तक अधिकांश सड़क नई एवं बंजर भूमि से बनाई जा रही है। यदि पूरी परियोजना ग्रीनफील्ड मानकों के अनुसार बनाई जा रही है तो शहर के भीतर से सड़क निकालने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का आरोप –
समिति ने कहा कि पिछले करीब 20 महीनों से सात किलोमीटर हिस्से का नक्शा, डिजाइन और तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सड़क एलिवेटेड होगी या भूतल पर बनेगी, कितने ओवरब्रिज बनेंगे, सड़क की चौड़ाई कितनी होगी तथा एक्सेस कंट्रोल की क्या व्यवस्था रहेगी, इसकी जानकारी प्रभावित नागरिकों को नहीं दी गई है। समिति ने इसे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल बताते हुए धारा-4 की प्रक्रिया स्थगित करने की मांग की।

जन संघर्ष समिति ने ये रखीं प्रमुख मांगें –
जन संघर्ष समिति ने प्रशासन से मांग की कि वर्तमान धारा-4 की कार्यवाही तत्काल रोकी जाए, सात किलोमीटर के प्रस्तावित हिस्से का नक्शा सार्वजनिक किया जाए, सभी प्रभावितों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के तहत चार गुना मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए तथा फोरलेन का एलाइनमेंट शहर से बाहर बंजर भूमि से निकाला जाए। समिति ने बताया कि इस संबंध में राज्यपाल, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी मंत्री, कलेक्टर रतलाम और एमपीआरडीसी को भी आपत्ति पत्र भेजा गया है।
दूसरी समिति ने कहा- यही मार्ग सबसे बेहतर –
वहीं बैठक में दूसरी समिति ने प्रशासन को समर्थन पत्र सौंपते हुए वर्तमान प्रस्तावित एलाइनमेंट को जनहित में बताया। समिति का कहना था कि हुसैन टेकरी चौराहे से जोयो होटल तक फोरलेन बनने से शासन को कम भूमि अधिग्रहित करनी पड़ेगी, निर्माण लागत कम आएगी और सरकारी धन की बचत होगी। समर्थन देने वाले नागरिकों ने कहा कि इस मार्ग के निर्माण से शहर में यातायात सुगम होगा, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसलिए प्रस्तावित फोरलेन का निर्माण बिना किसी अनावश्यक बदलाव के शीघ्र शुरू किया जाना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनी, निर्णय शासन स्तर पर –
लंबे समय तक चली बैठक में एमपीआरडीसी, एसडीएम और प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों समितियों के तर्क, आपत्तियां और सुझाव सुने। अधिकारियों ने सभी बिंदुओं को रिकॉर्ड में शामिल करते हुए नियमानुसार शासन को भेजने का आश्वासन दिया।
अब निगाहें शासन के फैसले पर –
जावरा-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना को लेकर शहर में स्पष्ट रूप से दो राय सामने आ चुकी हैं। एक पक्ष शहर के भीतर से निकलने वाले प्रस्तावित मार्ग का पुरजोर विरोध कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष उसी एलाइनमेंट को विकास और जनहित के लिए आवश्यक बता रहा है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि शासन और एमपीआरडीसी दोनों पक्षों की आपत्तियों और सुझावों के बीच किस दिशा में अंतिम निर्णय लेते हैं।



