– सावन से पहले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर,
– जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए बनेगी व्यापक कार्ययोजना
– विधायक बोले जरूरत पड़ी तो जनसहयोग से होगा विकास कार्य
जावरा। जावरा वासियों की आस्था के प्रमुख केंद्र श्री जागनाथ महादेव मंदिर की जर्जर छत के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय प्रशासनिक अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मंदिर परिसर पहुंचे और मौके पर भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद सावन माह के पहले मंदिर की मरम्मत करने और सावन बाद जिर्णोद्धार किए जाने के निर्देश दिए ।
श्रृद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरी –
मंदिर परिसर के शंकर मंदिर भाग की जर्जर छत और चिंताजनक स्थिति को देखते हुए विधायक डॉ. पांडेय ने अधिकारियों और इंजीनियरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की गरिमा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने इंजीनियरिंग टीम को पूरी कार्ययोजना तैयार कर अगले दो दिनों के भीतर मरम्मत कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
बारीकी से लिया मंदिर का जायजा –
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे मंदिर परिसर का बारीकी से जायजा लिया तथा आवश्यक विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों की रूपरेखा तैयार कर शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए। निरीक्षण के दौरान एसडीएम सुनील जायसवाल, मुख्य नगरपालिका अधिकारी चंद्रशेखर सोनिस, तहसीलदार सहदेव मोरे, नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि मोहम्मद यूसुफ कड़पा, उपाध्यक्ष सुशील कोचट्टा, मंडल अध्यक्ष राजेश शर्मा, प्रांजल पाण्डेय सहित लोक निर्माण विभाग, आरईएस एवं प्रशासन की संयुक्त टीम मौजूद रही।
सावन से पहले होगी मरम्मत –
निरीक्षण के बाद विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय ने कहा कि सावन माह प्रारंभ होने से पहले मंदिर की आवश्यक मरम्मत हर हाल में पूरी कर ली जाएगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि सावन के बाद मंदिर के व्यापक जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए एक विस्तृत प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। प्रस्ताव के आधार पर शासन से आवश्यक राशि की मांग की जाएगी। यदि किसी कारणवश पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं हो पाती है तो जनसहयोग के माध्यम से भी मंदिर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
बड़ा मंदिर व अन्य मंदिरों पर भी जताई चिंता –
विधायक डॉ पाण्डेय ने शहर के बड़ा मंदिर के साथ ही अन्य प्रमुख एवं प्राचीन मंदिरों की जर्जर स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए उनके संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए भी प्रस्ताव तैयार करने की बात कही। निरीक्षण के दौरान नगरपालिका के तकनीकी विशेषज्ञ, अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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