– स्थायीकरण, 50 प्रतिशत आरक्षण और मानदेय बढ़ाने सहित 12 मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
– प्रदेश स्तरीय आव्हान पर जावरा एसडीएम कार्यालय में सौंपा
जावरा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों ने अपने भविष्य की सुरक्षा और स्थायीकरण की मांग को लेकर अतिथि शिक्षक संघ मध्यप्रदेश के प्रदेश स्तरीय आव्हान के चलते प्रदेशभर में गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। जावरा में जिलाध्यक्ष कृष्ण कन्हैया सैनी के नेतृत्व में अतिथि शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम ज्ञापन रीडर गोपाल प्रजापत को सौंपा गया।
ज्ञापन में अतिथि शिक्षकों ने बताया कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक पिछले 18 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अपनी युवावस्था, ज्ञान और मेहनत से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे हैं। इसके बावजूद आज भी उन्हें स्थायी सेवा सुरक्षा नहीं मिल पाई है और हर वर्ष अनिश्चितता की स्थिति का सामना करना पड़ता है।
12 माह का सेवाकाल सुनिश्चित हो –
अतिथि शिक्षकों ने मांग की कि हरियाणा मॉडल लागू करते हुए वरिष्ठता और कार्य अनुभव के आधार पर अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक बनाया जाए और चरणबद्ध तरीके से स्थायीकरण किया जाए। साथ ही 12 माह का सेवाकाल सुनिश्चित करते हुए सेवानिवृत्ति आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।
अतिथियों को रिक्त पदों पर मिले 50 प्रतिशत आरक्षण –
ज्ञापन में यह भी मांग उठाई गई कि उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के शेष रिक्त पदों पर भी अतिथि शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए और उनके लिए अलग से काउंसलिंग आयोजित की जाए। साथ ही शिक्षक पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा उत्तीर्ण अतिथि शिक्षकों को आयु में छूट देकर कार्य अनुभव के आधार पर प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक पदों पर वरीयता दी जाए।
ऑनलाईन उपस्थिति की अनिवार्यता समाप्त हो –
अतिथि शिक्षकों ने ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि शिक्षक ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है, लेकिन तकनीकी समस्याओं और नेटवर्क की कमी के कारण कई बार उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे उनका मानदेय रोक दिया जाता है। अतिथि शिक्षकों ने मांग की कि ऑनलाइन उपस्थिति की अनिवार्यता समाप्त की जाए और तकनीकी कारणों से रोके गए मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए।
नए पंजीयन पर लगे तत्काल रोक –
इसके अलावा ज्ञापन में त्रस्नरूस् पोर्टल पर नए पंजीयन पर रोक लगाने, मानदेय में महंगाई के अनुसार प्रति वर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि करने, स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर और आकस्मिक मृत्यु पर 10 लाख रुपये की सहायता देने की भी मांग की गई। अतिथि शिक्षकों ने यह भी कहा कि ‘अतिथिÓ शब्द उन्हें अपनी ही शाला में अस्थायी और पराया महसूस कराता है, इसलिए उन्हें एक सम्मानजनक पदनाम दिया जाए। साथ ही बोर्ड परीक्षाओं की कापियों के मूल्यांकन कार्य में भी अतिथि शिक्षकों को अवसर प्रदान किया जाए। अतिथि शिक्षकों ने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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