– विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय की मांग पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की हैं घोषणा
— खाली पड़ी 100 बीघा शासकीय भूमि पर बन सकता हैं आउटडोर-इंडोर स्टेडियम, वर्षों पुरानी मांग को मिली रफ्तार
शैलेन्द्र सिंह चौहान , जावरा। लंबे समय से खेल सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे जावरा के खिलाडिय़ों और युवाओं के लिए बड़ी उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया जावरा दौरे के दौरान, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और खिलाडिय़िों की मांग को देखते हुए तथा विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने मंच से जावरा में आउटडोर-इंडोर स्टेडियम बनाए जाने की घोषणा की थी, उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी शिवराज सरकार के समय स्टेडियम की सुगबुगाहट हुई थी, लेकिन जमीन के अभाव में स्टेडियम मूर्त रुप नहीं ले सका था। वर्तमान में हुई इस घोषणा के बाद भी सबसे बड़ा रोड़ा जमीन का ही उठेगा, ऐसे में प्रतिनिधि शहर के समीप लगी शासकीय जमीन पर यह सौगात दिए जाने की संभावना व्यक्त की हैं। जिसमें शहर से लगे ग्राम बोरदा में राजस्व विभाग के अधीन खाली पड़ी लगभग 100 बीघा शासकीय भूमि पर आउटडोर एवं इंडोर स्टेडियम बनाया जा सकता हैं।
पॉलिटेक्निक कॉलेज की जमीन भी पड़ी हैं खाली –
स्टेडियम निर्माण के लिए शहर के पहाडिय़ा रोड स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने खाली भूमि को भी उपयुक्त माना गया हैं, लेकिन यह जमीन तकनीकी शिक्षा विभाग/कॉलेज के स्वामित्व में होने से विभागीय अनुमति, उपयोग परिवर्तन और प्रशासनिक स्वीकृतियों की लंबी प्रक्रिया के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पाने में परेशानी होगी, ऐसे में इस जमीन पर स्टेडियम को उतारना कठिन होगा।
बोरदा की जमीन से आसान होगी राह –
इसके विपरीत ग्राम बोरदा की भूमि सीधे मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग के अधीन होने से इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल मानी जा रही है। बारेदा की इस जमीन तक पहुंचने के लिए पिपलौदा रोड़ से भी मार्ग हैं और फोरलेन पर चुरु वाला दाल मिल के सामने से जाने वाले बन्नाखेड़ा होकर भी पहुंचा जा सकता हैं। भूमि आवंटन की कार्यवाही पूर्ण होते ही खेल एवं युवा कल्याण विभाग को जमीन उपलब्ध कराई जा सकेगी, जिससे परियोजना के शुरू होने की संभावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत हो गई है साथ ही आने वाले बजट में इसके लिए सरकार राशि भी स्वीकृत कर देगी तो सौगात जल्द ही धरातल पर उतर सकेगी।
प्रस्तावित आउटडोर स्टेडियम में मिल सकेगी सुविधाएँ –
जावरा में बनने वाले प्रस्तावित आउटडोर स्टेडियम को जिला स्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की योजना खेल विभाग द्वारा बनाई जा सकती हैं, इसमें संभावित रूप से 400 मीटर 8 लेन एथलेटिक्स ट्रैक, क्रिकेट व फुटबॉल मल्टी-यूज मैदान, कबड्डी व खो-खो मैदान, वॉलीबॉल एवं हैंडबॉल कोर्ट, ओपन जिम व प्रैक्टिस नेट, खिलाडिय़ों के ड्रेसिंग रूम, 3 से 5 हजार दर्शक क्षमता की गैलरी, कोचिंग ब्लॉक, पार्किंग व ग्रीन एरिया शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केवल 400 मीटर रनिंग ट्रैक ही लगभग 4-5 एकड़ भूमि घेरता है, जबकि पूरे आउटडोर स्टेडियम के लिए करीब 10-12 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है, जो बोरदा की उपलब्ध जमीन में संभव मानी जा रही है।
प्रस्तावित इंडोर स्टेडियम भी बन सकता हैं यहां –
परिसर में आधुनिक इंडोर स्टेडियम विकसित करने की भी योजना भी मूर्त रुप सकती हैं, जिसमें बैडमिंटन कोर्ट, कबड्डी कोर्ट, बास्केटबॉल /वॉलीबॉल कोर्ट, टेबल टेनिस हॉल, जिमनेजियम व योगा हॉल, खिलाडिय़ों के चेंजिंग रूम व हॉस्टल, चिकित्सा कक्ष व कोचिंग कक्ष के साथ ही करीब करीब 1 हजार दर्शकों की क्षमता वाली गैलरी बनाई जा सकती है।
खिलाडिय़ों को क्या होगा लाभ –
बोरदा की शासकीय जमीन पर यदि जावरा को आउटडोर व इंडोर स्टेडियम की सौगात मिलती हैं तो जावरा के खिलाडिय़ों को जिला मुख्यालय जाने की जरूरत कम होगी, राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएँ जावरा में संभव हो सकेंगी, खेल अकादमी खुलने की संभावना, ग्रामीण प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर, युवाओं में नशे व असामाजिक गतिविधियों से दूरी, स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
बीते कई वर्षों से थी मांग –
जावरा के कई खिलाड़ी क्रिकेट, कबड्डी और एथलेटिक्स में जिला व संभाग स्तर तक पहुँचते रहे हैं, लेकिन उचित मैदान और प्रशिक्षण सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएँ आगे नहीं बढ़ पाती थीं। इसी कारण लंबे समय से एक समग्र खेल परिसर की मांग उठ रही थी। जिसके लिए जनप्रतिनिधि प्रयासरत थे, लेकिन जमीन के अभाव में अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी थी। अब जब जमीन भी उपलब्ध हैं तो संभवत: शहर की यह वर्षो पुरानी मांग पूरी होगी और खिलाडिय़ों के लिए खैल मैदान संभव हो पाएगा।
जनहित का महत्वपूर्ण कदम –
यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो जावरा न केवल रतलाम जिले बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी प्रमुख खेल केंद्र बन सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल स्टेडियम नहीं, बल्कि भविष्य में मिनी स्पोर्ट्स सिटी की नींव साबित हो सकता है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को पहली बार अपने क्षेत्र में ही राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का अवसर मिलेगा।
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