– किसानों के दबाव के आगे झुका प्रशासन, शुक्रवार को भोपाल में हुई उच्च स्तरीय बैठक में हुआ निर्णय
– सर्वे रिपोर्ट नहीं मिलने और किसानों की मर्जी के बीना न निमार्ण और ना ही मिलेगा मुआवजा
भोपाल। उज्जैन से जावरा तक प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल वे के खिलाफ किसानों का आक्रोश आखिर रंग लाया। अपनी उपजाऊ जमीनें बचाने की लड़ाई लड़ रहे लगभग 200 भू-स्वामी शुक्रवार को सीधे मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के भोपाल मुख्यालय जा धमके और स्पष्ट शब्दों में सरकार को चेतावनी दी—किसानों की सहमति के बिना एक इंच जमीन नहीं देंगे।
किसानों के तीखे विरोध और ठोस तर्कों के बाद मंत्रालय में शुक्रवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को बैकफुट पर आना पड़ा। वरिष्ठ स्तर से निर्देश जारी हुए कि प्रस्तावित उज्जैन-जावरा एक्सेस कंट्रोल मार्ग का नए सिरे से ट्रैफिक सर्वे कराया जाए।
जरूरत नहीं तो एक्सेस कंट्रोल सड़क रद्द –
बैठक में साफ कहा गया कि यदि ट्रैफिक सर्वे में एक्सेस कंट्रोल वे की अनिवार्यता साबित नहीं होती, तो जमीन पर सामान्य हाईवे ही बनाया जाएगा। यानी किसानों की उपजाऊ जमीनों को बेवजह बर्बाद करने वाली योजना पर तलवार लटक गई है। ऐसे में अब सिंहस्थ 2028 से पहले यह मार्ग बनने में काफी परेशानियां आएगी।
किसानों की सहमति के बिना न निर्माण, न मुआवजा –
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम ने यह भी भरोसा दिलाया कि सर्वे रिपोर्ट के बाद ही अंतिम निर्णय होगा, किसानों की सहमति के बिना न सड़क बनेगी,न ही जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ पहला कदम है। जब तक लिखित गारंटी और जमीन बचाने का ठोस फैसला नहीं आता, संघर्ष जारी रहेगा। क्षेत्र में इस परियोजना को लेकर पहले ही भारी असंतोष है और ग्रामीण इसे जमीन छीनो योजना करार दे रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों के पक्ष में खड़ी होती है या फिर पूंजीपरस्त विकास के नाम पर एक बार फिर अन्नदाताओं को उजाडऩे की तैयारी की जाती है।
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