– सैकड़ों सनातनी परिवारों की सहभागिता, राष्ट्रप्रथम का दिया संदेश
जावरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में जावरा नगर की विश्वनाथ बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन चारभुजानाथ धाकड़ धर्मशाला (पिछली ओर) में किया गया। सम्मेलन में बस्ती क्षेत्र के सैकड़ों सनातनी परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर राष्ट्रप्रथम, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक चेतना का परिचय देते हुए हिंदू एकता का संकल्प लिया।
गौ पूजन, शास्त्र- शस्त्र पूजन के साथ हुआ शुभारंभ –
प्रचार संयोजक उमेश शर्मा ने बताया कि सम्मेलन का शुभारंभ सर्वप्रथम गौ माता पूजन, शास्त्र पूजन एवं शस्त्र पूजन के साथ किया गया। इससे पूर्व सभी समाजजन एवं मातृशक्ति सोमवारिया स्थित कार्यालय से बैंड-बाजों व ढोल-ढमाकों के साथ चल समारोह के रूप में सम्मेलन स्थल पहुंचे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में भागवताचार्य कपिलजी पौराणिक (बड़ावदा), संयोगिता सिंह संचालिका, रतलाम पब्लिक स्कूल एवं विभाग धर्म जागरण प्रमुख नमित करवे उपस्थित रहे। आयोजन समिति से पालक अजीत चत्तर, संयोजक सुभाष टुकडिय़ां, संयोजिका हेमा पगारिया एवं समाजसेवी इंदरमल टुकडिय़ां मंचासीन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के जयकारों के साथ किया गया। प्रतिभा अभय मंडलेचा ने भावपूर्ण गीत की प्रस्तुति दी।
छात्राओं की प्रस्तुतियों ने मोहा मन –
सेंट पॉल स्कूल की छात्रा कनक पांचाल एवं प्रियांशी पांचाल ने देशभक्ति पर आधारित प्रस्तुति दी। सरस्वती पुरम की छात्राएं दिव्यांशी जटिया, वंदना सोनी, दिव्यांशी धाकड़, भूमिका, महिमा, इशीता एवं हर्षिता ने वीरता पर आधारित अत्यंत प्रभावशाली एवं मार्मिक मंचन प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्रा श्रद्धा बैरागी ने झांसी की रानी के स्वरूप में प्रेरक उद्बोधन दिया। सभी छात्राओं को सम्मानित किया गया।
समाजसेवियों का हुआ सम्मान –
समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए कैलाश कायस्थ, राधाकिशन मेहता, मदन प्रजापत, राजमल बिंदुजी बरैया, इंदरमल टुकडिय़ां एवं मनोहरलाल पांचाल को समारोह में सम्मानित किया गया। अतिथियों के उद्बोधन पश्चात भारत माता की आरती की गई तथा तत्पश्चात समरसता सहभोज का आयोजन हुआ। समस्त कार्यक्रमों में बस्ती के सैकड़ों नागरिकों ने सहभागिता कर सम्मेलन को सफल बनाया। भागवताचार्य श्री कपिलजी पौराणिक ने कहा कि हमारे देवी-देवताओं के एक हाथ में आशीर्वाद तो दूसरे हाथ में शस्त्र होते हैं, जो धर्म रक्षा का प्रतीक है। आज आवश्यकता है कि गीता-भागवत को केवल पूजा तक सीमित न रखकर जीवन में उतारा जाए। संचालन समाजसेवी ललितजी भंडारी ने किया। आभार संयोजक सुभाषजी टुकडय़िां ने व्यक्त किया।
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