– चहेते स्कूलों को फायदा और जावरा के गरीब बच्चों का भविष्य चौपट
– नियमों को ताक पर रखकर चल रहा पसंद, नापसंद का खैल
जावरा। गरीब वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के नाम पर शुरू की गई संदीपनि विद्यालय योजना जावरा में अब शिक्षा का सबसे बड़ा छलावा बनती जा रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस विद्यालय में जरूरतमंद बच्चों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है और चयन प्रक्रिया को इस तरह मोड़ा गया है कि कुछ चुनिंदा स्कूलों के बच्चों को ही फायदा मिले।
संदीपनि विद्यालय में प्रवेश के लिए शर्त रखी गई है कि केवल 1 से 2 किलोमीटर की परिधि में स्थित सरकारी स्कूलों के बच्चों को ही प्राथमिकता मिलेगी, जबकि वास्तविकता यह है कि 5 किलोमीटर के दायरे में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं, जहां गरीब, मेहनती और मेधावी बच्चे पढ़ते हैं। इस नियम ने गरीब पालकों के सपनों पर ताला लगा दिया है, जो मजदूरी कर अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे थे।
खराब परीक्षा परिणामों से बचने बनाई योजना –
सबसे गंभीर बात यह है कि शिक्षा विभाग द्वारा केवल कक्षा 1 से 8 तक के सरकारी स्कूलों को ही संदीपनि में मर्ज किया जा रहा है, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों को जानबूझकर बाहर रखा गया है, ताकि बोर्ड परीक्षा के खराब परिणामों की जिम्मेदारी से बचा जा सके। यह निर्णय नहीं बल्कि जिम्मेदारी से भागने की रणनीति दिखाई दे रही है।
नियम ताक पर, सिफारिश से पसंद नापसंद का खेल –
सूत्रों के अनुसार विभागीय सूची में जिन स्कूलों के नाम तक नहीं हैं, उन्हें भी संदीपनि में शामिल किया जा रहा है, जबकि वर्षों से बेहतरीन परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूलों को बाहर कर दिया गया। इससे यह साफ हो गया है कि यहां नियम नहीं, बल्कि सिफारिश और पसंद-नापसंद चल रही है। ऐसे में गरीब वर्ग के बच्चों के साथ यह योजना एक झलावा ही सिद्ध हो रही हैं।
जावरा के बच्चों का भविष्य अंधेरे में –
संदीपनि विद्यालय बनने के बाद जावरा के बच्चों के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि शहर में अब 11वीं कक्षा के लिए कोई भी सरकारी स्कूल उपलब्ध नहीं बचा। महात्मा गांधी स्कूल को संदीपनि बना कर प्रवेश बंद कर दिया गया, हाई स्कूल काटजू केवल 10वीं तक सीमित है और कमला नेहरू विद्यालय सिर्फ कन्या स्कूल है। ऐसे में जावरा जैसे बड़े शहर के बच्चों को 11वीं पढऩे के लिए अब गांवों में जाना पड़ेगा, जो शहरी विद्यार्थियों के साथ खुला अन्याय है।
बिना सहमति, बिना पारदर्शिता –
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पालकों की सहमति के बिना स्कूलों को मर्ज कैसे किया जा रहा है ? क्या शिक्षा विभाग को यह अधिकार है कि वह बच्चों के भविष्य से ऐसे खिलवाड़ करे ?
मांग : सबको समान अवसर –
शिक्षाविदों और अभिभावकों की मांग है कि संदीपनि विद्यालय जावरा में सभी वर्गों और सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल किया जाए। साथ ही जब तक चयनित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक विद्यार्थियों को प्रवेश देकर उनका भविष्य अधर में न डाला जाए। यदि समय रहते निर्णय नहीं बदला गया, तो संदीपनि योजना शिक्षा का मंदिर नहीं, गरीब बच्चों के सपनों की कब्र बन जाएगी।
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