– 2025 का फसल बीमा नहीं मिलने पर किसानों ने बीमा कंपनी कर्मचारी का किया घेराव
– कृषि विस्तार अधिकारी और पटवारी की मौजूदगी में हुई तीखी बैठक।
जावरा। ग्राम लुहारी में वर्ष 2025 के फसल बीमा का लाभ नहीं मिलने से किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। बड़ी संख्या में किसानों ने गांव पहुंचे बीमा कंपनी के कर्मचारी का घेराव कर जवाब मांगा। मौके पर कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी सहित ग्राम पंचायत सरंपच, सचिव व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। किसानों ने आरोप लगाया कि हर वर्ष बैंक से फसल बीमा की प्रीमियम राशि काट ली जाती है, लेकिन फसल खराब होने के बावजूद बीमा क्लेम नहीं मिल रहा है।
बैठक में किसानों ने कहा कि 2021 से लेकर 2025 तक लगातार बीमा की किश्तें कट रही हैं, लेकिन नुकसान के बाद भी उन्हें फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिला। इससे किसानों में भारी नाराजगी है। पटवारी रसुबाला गामड़ ने बताया कि फसल नुकसान की जानकारी शासन को भेजी गई थी, जिसके आधार पर किसानों को राहत राशि (मुआवजा) मिल चुका है। इधर किसानों का कहना हैं कि मुआवजा मिलने के बाद भी वर्ष 2025 का फसल बीमा गांव के लगभग किसी भी किसान के खाते में नहीं पहुंचा।
नहीं मिला डेटा, इसलिए नहीं हो पा रहा क्लैम –
बीमा कंपनी के कर्मचारी विनोद ने किसानों को बताया कि लुहारी गांव का रिकॉर्ड अभी तक कंपनी को प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए क्लेम जारी नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि किसानों की प्रीमियम राशि बैंक के माध्यम से जमा होती है और शासन से डेटा मिलने के बाद ही कंपनी क्लेम का भुगतान करती है।
डेटा पर मची खींचतान, किसान बीच में पिस रहे –
फसल बीमा क्लेम को लेकर सबसे बड़ा सवाल अब डेटा की जिम्मेदारी पर खड़ा हो गया है। शासन की ओर से आवश्यक डेटा कृषि विभाग और फसल बीमा कंपनी दोनों को उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन सही डेटा आखिर किसके पास है, इसका स्पष्ट जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं मिला। लुहारी में हुई बैठक के बाद जब कृषि विस्तार अधिकारी से पूछा गया कि डेटा किसके पास है, तो उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड बीमा कंपनी के पास रहता है। वहीं जब यही सवाल बीमा कंपनी के कर्मचारी से किया गया तो उनका जवाब था कि डेटा कृषि विभाग के पास रहता है। यानी एक अधिकारी जिम्मेदारी दूसरे पर डाल रहा है और दूसरा पहले पर। इस खींचतान के बीच सबसे बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि डेटा की गड़बड़ी, लापरवाही या समन्वय की कमी के कारण वर्षों से उनका फसल बीमा अटका हुआ है।
रिमोट सेंसिंग और अधूरे रिकॉर्ड का हवाला –
बीमा कंपनी के अनुसार फसल बीमा क्लेम रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) से प्राप्त आंकड़ों और पिछले लगभग सात वर्षों के औसत उत्पादन के आधार पर तय किया जाता है। कंपनी का कहना है कि जावरा क्षेत्र के कई हल्कों का डेटा और सूची अभी तक प्राप्त नहीं हुई, जिसके कारण अनेक किसानों के क्लेम लंबित हैं।
सिर्फ एक किसान को मिला व्यक्तिगत क्लेम –
कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि लुहारी में केवल एक किसान को व्यक्तिगत सर्वे (Individual Claim Survey) के आधार पर बीमा राशि मिली है। बाकी किसानों को अब भी भुगतान का इंतजार है।
प्रीमियम समय पर, क्लेम कब ? –
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसानों से हर वर्ष समय पर प्रीमियम वसूला जा रहा है, तो क्लेम देने के समय डेटा का बहाना क्यों बनाया जा रहा है ? यदि कृषि विभाग और बीमा कंपनी के बीच समन्वय नहीं है, तो इसकी कीमत आखिर किसान क्यों चुकाएं ? किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार फसल बीमा योजना को किसानों की सुरक्षा कवच बताती है, वहीं दूसरी ओर प्रीमियम कटने के बाद भी क्लेम के लिए वर्षों तक भटकना पड़ रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे जिला प्रशासन और बीमा कंपनी के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।

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