– पति-पत्नी के सात टूटते रिश्ते जुड़े, दाम्पत्य जीवन की पुर्नस्थापना
– विद्युत, नपा, बैंक, बीमा व चेक प्रकरणों में रिकॉर्ड समाधान
जावरा। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रतलाम सुश्री नीना आशापुरे के मार्गदर्शन में शनिवार 13 दिसंबर 2025 को तहसील न्यायालय जावरा में नेशनल लोक अदालत का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया।
लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति जावरा जंगबहादुर सिंह राजपूत, द्वितीय जिला न्यायाधीश परमानन्द चौहान, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड एन.एस. ताहेड, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड अरुणसिंह अलावा, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड अंकित भुजंग, चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड दीपक कनेरिया, पंचम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड सुश्री नेहासिंह परिहार, षष्ठम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड सुश्री शिवानी राठौर, अभिभाषक संघ जावरा अध्यक्ष जगदीश धाकड़ सहित समस्त न्यायिक अधिकारीगण, अधिवक्तागण एवं न्यायालय स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
8 खण्डपीठों में हुआ 386 प्रकरणों का निराकरण –
नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन हेतु तहसील न्यायालय जावरा में कुल 08 खण्डपीठों का गठन किया गया। लोक अदालत में न्यायालय में लंबित क्लेम प्रकरण 03, एनआई एक्ट (चेक अनादरण) के 37 प्रकरण, सिविल 39, विद्युत अधिनियम 44, आपराधिक 79 तथा हिन्दू विवाह अधिनियम के 06 प्रकरणों सहित कुल 208 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिससे 455 पक्षकार लाभान्वित हुए। इन प्रकरणों में रुपए 95,54,250/- की राशि का सेटलमेंट हुआ। इसके अतिरिक्त बैंक, बीमा कंपनी, विद्युत विभाग तथा नगर पालिका के जलकर एवं संपत्तिकर से संबंधित प्री-लिटिगेशन (वादपूर्व) के कुल 178 प्रकरणों का निराकरण कर रुपए 8,60,160/- की राशि की वसूली की गई। इस प्रकार कुल मिलाकर 386 प्रकरणों का निराकरण कर रुपए 1 करोड़ 04 लाख से अधिक की राशि का समाधान किया गया। विशेष रूप से विद्युत अधिनियम के अंतर्गत विशेष न्यायाधीश जंगबहादुर सिंह राजपूत के न्यायालय में विद्युत विभाग जावरा द्वारा प्रस्तुत सर्वाधिक राशि के प्रकरण में अभियुक्त नवाजिश अली पिता लियाकत के विरुद्ध 2,08,185/- की वसूली कर प्रकरण का निराकरण किया गया, जो लोक अदालत की बड़ी उपलब्धि रही।
लोक अदालत की मानवीय पहल, सात टूटते परिवार फिर जुड़े –
इस लोक अदालत की सबसे प्रेरक और संवेदनशील उपलब्धि द्वितीय जिला न्यायाधीश परमानन्द चौहान के न्यायालय में देखने को मिली, जहां हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत लंबित 07 प्रकरणों में पति-पत्नी एवं उनके परिजनों की सहमति से राजीनामा कराकर दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना कराई गई। न्यायाधीश द्वारा निरंतर समझाइश, संवाद और पारिवारिक मूल्यों पर जोर देने से वर्षों से अलग रह रहे दंपतियों ने पुन: साथ रहने का निर्णय लिया। सुलह के पश्चात सभी सात दंपतियों एवं उनके परिजनों को पौधे भेंट कर शुभकामनाओं के साथ खुशी-खुशी घर विदा किया गया, जिससे लोक अदालत की सामाजिक और मानवीय भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई।
न्याय के उत्सव की सफल कहानी –
इन्हीं में से एक प्रकरण पति मोहित दायमा निवासी जावरा एवं पत्नी रीना दायमा निवासी आलोट से संबंधित था, जिनका विवाह 22 जनवरी 2022 को हुआ था। पारिवारिक मतभेदों के कारण दोनों अलग-अलग रहने लगे थे। न्यायालय में प्रस्तुत हिन्दू विवाह अधिनियम के प्रकरण में नेशनल लोक अदालत के दौरान दोनों पक्षों को समझाकर आपसी सहमति से राजीनामा कराया गया और दाम्पत्य जीवन को पुन: स्थापित किया गया।
इनकी रही व्यापक सहभागिता –
लोक अदालत के आयोजन में बैंक स्टाफ, एमपीईबी स्टाफ, नगर पालिका स्टाफ, खण्डपीठ सदस्यगण, नायब नाजिर एवं तहसील विधिक सेवा समिति जावरा के समस्त कर्मचारीगण की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम में न्यायालय स्टाफ एवं अधिवक्तागण की उपस्थिति ने आयोजन को सफल और प्रभावी बनाया। नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण न्याय के माध्यम से न केवल प्रकरणों का निराकरण संभव है, बल्कि टूटते सामाजिक रिश्तों को भी जोड़ा जा सकता है।
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