– 04 सालों से अलग रह रहे दम्पत्ति मेंं हुई सुलह,
– जावरा की 9 खण्ड पीठों में आपसी समझोते के आधार पर निराकृत हुए प्रकरण
जावरा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रतलाम के मार्गदर्शन में शनिवार को आयोजित हुई नेशनल लोक अदालत में न्यायालय में लंबित क्लेम प्रकरण 34 एस. सी.एन.आई.ए चैक संबंधी प्रकरण 45, सिविल प्रकरण प्रकरण 45, विद्युत अधिनियम प्रकरण 37 आपराधिक प्रकरण 181, हिन्दू विवाह अधिनियम प्रकरण 01 राजीनामा योग्य सिविल व अपराधिक प्रकरणों सहित करीब 343 प्रकरणों का आपसी समझोते के आधार पर निराकरण होकर करीब 3 करोड़ 84 लाख 87 हजार 91 रुपए की राशि के अवार्ड पारित किए गए। का निराकरण हुआ। नेशनल लोक अदालत में राशि 3.84.87.091/- रूपये की राशि सहित 343 प्रकरणों का निराकरण कर 878 को लाभावित एवं बैंक, बीमा कंपनी विद्युत अधिनियम, नगर पालिका के जलकर व संपत्तिकर के प्री-लिटिगेशन प्रकरण (वादपूर्व) कुल 254 प्रकरणों का निराकरण कर राशि 13 लाख 04 हजार 181 रूपये की राशि की बसूली की गयी। इस प्रकार कुल 597 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 3 करोड़ 97 लाख 91 हजार 272 रुपए की राशि की वसुली की गई।
दम्पत्तियों में हुई सुलह, साथ रहने को हुए राजी –
नेशनल लोक अदालत की खण्डपीठ कमांक 25 पीठासीन अधिकारी / जिला न्यायाधीश जंगबहादुर सिंह राजपूत में रखे गये प्रकरणों में राकेश पिता रामचन्द्र बागरी निवासी ग्राम नांदलेटा तहसील पिपलौदा जिला रतलाम का विवाह पूजाबाई पति राकेश बागरी हाल मुकाम ग्राम हतई तहसील नागदा जिला उज्जैन का विवाह वर्ष 2012 में हिन्दू रीति-रिवाज के साथ सम्पन्न हुआ था। विवाह के पश्चात दम्पति के पश्चात 02 संतान का जन्म हुआ। विवाह के पश्चात दम्पति के बीच आपस में पत्नी ससुराल से बिना बताये बार-बार अपने माता-पिता के घर चली जाती थी. इसके बाद उनके मध्य छोटी-छोटी बातों को लेकर वाद-विवाद होने लगा। पत्नी के इस व्यवहार के कारण पति व बच्चे मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे है और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा व संस्कारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उक्त स्थिति के बाद पति द्वारा न्यायालय में धारा 09 हिन्दू विवाह अधिनियम दान्पत्य जीवन की पुर्नस्थापना हेतु प्रकरण पेश किया था, न्यायालय के माध्यम से दाम्पत्य जीवन की पुर्नस्थापना की मांग की थी। पति-पत्नी पृथक-पृथक निवास कर रहे थे। न्यायालय द्वारा बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पति-पत्नि को विवाद के समझौते के लिए बार-बार समझाइश दी, उक्त समझाइश के बाद दिनांक 14 दिसम्बर 2024 को आयोजित नेशनल लोक अदालत में पति-पत्नि ने साथ रहने का समझौता कर एवं आपसी विवाद को खत्म कर अपने बच्चों के साथ नये जीवन प्रारंभ कर रहे है। जिला न्यायाधीश जंगबहादुरसिंह राजपूत द्वारा अभिभाषकगण की उपस्थिति में पति-पत्नी को पौधा प्रदान किया गया। पति-पत्नि एक साथ होकर अपनी के साथ घर गये। इस अवसर पर अभिभाषक हिम्मतसिंह श्रीमाल, सौरभ गेलडा, मोहनी राठौर उपस्थित रहे।
न्यायाधिशों ने दीप प्रज्वल्लन कर किया शुभारंभ –
तहसील न्यायालय जावरा में जिला न्यायाधीश / अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति, जावरा जंगबहादुरसिंह राजपूत, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड अरविन्द कुमार बरला, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड एन.एस. ताहेड, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड हर्षिता पिपरेवार, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड ऋचा द्विवेदी भुजंग, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड अंकित भुजंग, चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड दीपक कनेरिया, पंचम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड जावरा नेहासिंह परिहार, षष्ठम न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड जावरा शिवानी राठौर एवं अभिभाषक संघ जावरा अध्यक्ष दिनेश चौहान, सचिव भारत सैनी के साथ समस्त अभिभाषकगण, समस्त अधिकारीगण एवं न्यायालय कर्मचारियों की उपस्थिति में दीप प्रज्जलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया गया।
इनकी रही उपस्थिति –
लोक अदालत में बैंक स्टॉफ एमपीईबी स्टॉफ, नगर पालिका स्टॉफ, खण्डपीठ सदस्यगण, न्यायालय स्टॉफ देवेन्द्र रामावत, धर्मेन्द्र यादव, मनोज ओहारी, इन्द्रकुमार शेण्डे, नेहा भार्गव, मयंक मेहरा, रोहित गुप्ता, रंजीत कुशवाह, पुष्पेन्द्र कुशवाह, अभिषेक शर्मा, नायब नाजिर चंद्रपाल माहौर, कैलाश अवासे, राजेन्द्र जैन, मनीष नरोटे, पर्वत यादव, शैलेन्द्र वर्मा, जाहिदा कुरेशी, कैलाश मिश्रा, प्रमोद मेवाडा, मनीष कशिव, नेहा अहिरवार, प्रियंका यादव, प्रकाश सूर्यवशी, केवल दावरे, श्वेता सहित तहसील विधिक सेवा समिति जावरा स्टॉफ उपस्थित रहा।
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