– युरिया के साथ अन्य दवाईयों के पैकेट भी किसानों को चिपका रहे दुकानदार
– युरिया की कालाबाजारी पर कृषि अधिकारी व नहीं लगा पा रहे लगाम
जावरा। रबी के सीजन में हर साल की तरह इस बार भी यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। किसानों को सरकार द्वारा तय दाम से करीब 100 रुपए अधिक दाम मे युरिया खरीदकर अपनी फसल को बचाना पड़ रहा हैं। सरकारी गोदाम से ही किसानों को युरिया हम्माली सहित करीब 270 रुपए में मिल रहा हैं, लेकिन जो किसान निजी खाद-बीज विक्रेताओं से युरिया खरीद रहे हैं, उन्है ये दुकानदार तय दाम से अधिक में युरिया बेच रहे हैं साथ किसानों पर यूरिया के साथ अन्य दवाइयों के प्रोडक्ट खरीदने का दबाव भी बना रहे हैं। फसल को बचाने की मशक्कत में जुटा किसान मजबूर होकर महंगे दामों पर यूरिया खरीद रहा है। हालांकि अफसर कहीं भी यूरिया की कालाबाजारी होने की बात से इन्कार कर रहे हैं। वहीं कृषि विभाग के अधिकारी युरिया की इस कालाबाजारी पर लगाम लगाने में भी नाकाम दिख रहे हैं।
जिले के साथ ही तहसील स्तर पर पंजीकृत किसानों को तो सहकारी समितियों से शासन द्वारा तय दाम पर यूरिया मिल रहा है लेकिन ऐसे किसान जो समितियों में पंजीकृत नहीं हैं उन्हें यूरिया की एक-एक बोरी के लिए भटकना पड़ रहा है। किसानों की इसी लाचारी का फायदा खाद-बीज विक्रेता उठा रहे हैं। यूरिया की जमकर कालाबाजारी हो रही है,कहीं 320 रुपये तो कहीं 350 तो कहीं 370 रुपए से 400 रुपए बोरी तक यूरिया की कीमत वसूली जा रही है, जबकि 45 से 50 किलो की यूरिया की बोरी की निर्धारित कीमत 266 रुपये है। ऐसा नहीं है कि खाद-बीज दुकानों पर चल रही इस तरह की अनियमितता की जानकारी अधिकारियों को नहीं है। जिला स्तर से भी अधिकारियों द्वारा युरिया की कालाबाजारी करने वाले खाद-बीज विक्रेताओं के लायसेंस निरस्त करने की चेतावनी भी दी गई, लेकिन उसके बाद भी यूरिया की कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है। शहर हो या ग्रामीण क्षेत्रों की खाद-बीज दुकानें हर जगह यूरिया लेने के लिए पहुंचने वाले किसान से तय दाम से 100 रुपए अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। जो दुकानदार किसानों को वास्तविक कीमत पर यूरिया दे रहे हैं वे यूरिया के साथ अन्य खाद खरीदने की शर्त रख रहे हैं। ऐसे में किसान मजबुर होकर अपनी फसल को खराब होने बचाने के लिए दुकानदारों की शर्त मान रहा हैं, या अधिक दाम पर युरिया खरीद रहा हैं।
पुरानी धानमंडी से खरीदी 370 रुपए में बोरी –
जावरा तहसील के रिछाचांदा के किसान रमेश धनगर ने बताया कि पुरानी धानमंडी स्थित दुकान से युरिया की बोरी 370 रुपए प्रति बोरी के मान से दो बोरी खरीदकर लाए हैं, वहीं लुहारी के प्रेमचंद ने बताया कि वे गुलशन गार्डन के सामने स्थित दुकान से 350 रुपये में यूरिया खरीदी, साथ में 150 रुपये का अन्य पाउच भी जबरजस्ती दिया, नहीं लेने पर यूरिया नहीं देने कि बात कही l कुछ अन्य किसानों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वे भी 350 से 370 रुपए के दाम पर युरिया खरीदकर लाए हैं, किसानों ने बताया कि उनकी मजबुरी हैं कि उन्है महंगे दाम पर युरिया खरीदना पड़ रहा हैं। क्यों कि सरकारी गोदाम पर युरिया समय पर मिलता नहीं हैं, ऐसे में निजी दुकानदार उनसे मनमानी किमत वसुल करते हैं। फसल खराब ना हो ऐसे में मजबुर होकर उन्है दुकानदारों के मांगे दाम पर युरिया खरीदना पड़ रही हैं।

